हिमाचल प्रदेश के नादौन क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य तेजी से चल रहा है। विद्युत उपमंडल नादौन के सहायक अभियंता अक्षय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार की आरडीएसएस (Revamped Distribution Sector Scheme) योजना के तहत पुराने बिजली मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदला जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य बिजली वितरण प्रणाली को अधिक कुशल और पारदर्शी बनाना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि स्मार्ट मीटर लगाने के लिए उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं डाला जा रहा है। यानी उपभोक्ताओं को इस प्रक्रिया के लिए किसी प्रकार का भुगतान नहीं करना होगा। यह पूरी प्रक्रिया सरकार की योजना के तहत संचालित की जा रही है।
अक्षय कुमार ने बताया कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा जारी संशोधित नियमों के अनुसार सभी उपभोक्ताओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर स्मार्ट मीटर उपलब्ध करवाना अनिवार्य किया गया है। यह प्रावधान बिजली वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाने और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देने के उद्देश्य से लागू किया गया है।
उन्होंने विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 163 (1) का उल्लेख करते हुए बताया कि लाइसेंसी या उसके अधिकृत प्रतिनिधि को उचित सूचना देकर किसी भी परिसर में प्रवेश करने, मीटर की जांच, मरम्मत या प्रतिस्थापन करने का अधिकार है। यह एक कानूनी प्रावधान है, जिसका पालन सभी उपभोक्ताओं को करना आवश्यक है।
इसके अलावा, धारा 163 (3) के तहत यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई उपभोक्ता अधिकृत अधिकारी को अपने परिसर में प्रवेश करने या कार्य करने से रोकता है, तो लिखित सूचना के 24 घंटे बाद उसकी बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद की जा सकती है। यानी यदि कोई उपभोक्ता स्मार्ट मीटर लगाने में बाधा डालता है, तो उसे बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है।
नादौन क्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य अधिकृत एजेंसी “मैसर्स अप्रावा हमीरपुर स्मार्ट मीटर प्राइवेट लिमिटेड” को सौंपा गया है। विभाग ने बताया कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही इस एजेंसी को यह जिम्मेदारी दी गई है। इसके बावजूद कुछ उपभोक्ता एजेंसी के कर्मचारियों को अपने परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दे रहे हैं, जो नियमों के विरुद्ध है।
सहायक अभियंता अक्षय कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद वर्तमान पोस्टपेड उपभोक्ताओं की बिजली दरों या सब्सिडी में कोई बदलाव नहीं होगा। कई उपभोक्ताओं में यह भ्रम है कि स्मार्ट मीटर लगने से बिल बढ़ जाएगा, लेकिन विभाग ने इस तरह की सभी आशंकाओं को निराधार बताया है।
उन्होंने कहा कि बिजली मीटर सामान्यतः लाइसेंसी की संपत्ति होते हैं और उनका प्रतिस्थापन एक नियमित तकनीकी प्रक्रिया है। इसलिए उपभोक्ताओं को इस प्रक्रिया में सहयोग करना चाहिए और किसी भी प्रकार का विरोध नहीं करना चाहिए।
विभाग ने सभी उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अधिकृत अधिकारियों, कर्मचारियों और एजेंसी को सहयोग दें और स्मार्ट मीटर लगाने की अनुमति प्रदान करें। इससे न केवल बिजली व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी बेहतर और पारदर्शी सेवाएं मिलेंगी।
अंत में सहायक अभियंता ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस आग्रह के बावजूद कोई उपभोक्ता स्मार्ट मीटर लगाने में बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ विद्युत अधिनियम-2003 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें बिजली आपूर्ति का विच्छेदन भी शामिल हो सकता है।