मंडी में निटिंग प्रशिक्षण से महिलाएं आत्मनिर्भर

rakesh nandan

29/04/2026

हिमाचल प्रदेश में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मंडी जिले के बग्गी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना के अंतर्गत निटिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह प्रशिक्षण खंड परियोजना प्रबंधन इकाई (बीपीएमयू) मंडी द्वारा आजीविका गतिविधियों के तहत आयोजित किया गया था।

करीब साढ़े चार माह तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 8 प्रशिक्षुओं ने भाग लिया। इस दौरान उन्हें निटिंग की आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल का विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करना था।

प्रशिक्षण के समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. हेमराज वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के कौशल विकास कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि निटिंग जैसे कौशल के माध्यम से महिलाएं घर बैठे ही आय अर्जित कर सकती हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना सकती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार और प्रशासन का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे न केवल अपने परिवार बल्कि समाज के विकास में भी योगदान दे सकें। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का भी कार्य करते हैं।

प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद सभी प्रशिक्षुओं को परियोजना की ओर से टूलकिट के रूप में निटिंग मशीन प्रदान की गई। यह कदम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे प्रशिक्षु तुरंत अपना स्वरोजगार शुरू कर सकेंगी और प्रशिक्षण के दौरान सीखे गए कौशल का व्यावहारिक उपयोग कर पाएंगी।

कार्यक्रम के दौरान विषय विशेषज्ञ डॉ. खूब राम ठाकुर, खंड परियोजना प्रबंधक डॉ. राजेश कुमार तथा कृषि विकास अधिकारी हंसराज वालिया ने भी उपस्थित होकर प्रशिक्षुओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने महिलाओं को अपने कौशल को निरंतर विकसित करने और बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद तैयार करने की सलाह दी।

विशेषज्ञों ने बताया कि आज के समय में हैंडलूम और निटिंग उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। यदि महिलाएं गुणवत्ता और डिजाइन पर ध्यान दें, तो वे स्थानीय स्तर से लेकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक अपने उत्पादों को बेच सकती हैं। इससे उनकी आय में वृद्धि होगी और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी।

प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं ने भी अपने अनुभव साझा किए और इस कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण से उन्हें नई तकनीकों की जानकारी मिली और अब वे आत्मविश्वास के साथ अपना कार्य शुरू करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने परियोजना प्रबंधन इकाई का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की अपेक्षा जताई।

इस अवसर पर हाटेश्वरी हैंडलूम बग्गी के प्रधान सिधु राम भारद्वाज, सचिव बबलू भारद्वाज, सरला देवी सहित सभी प्रशिक्षु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा के साथ हुआ, जहां सभी ने मिलकर महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में इस पहल की सराहना की।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इस बात का उदाहरण है कि यदि सही दिशा और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपनी एक अलग पहचान बना सकती हैं।