गायनी ओपीडी शिफ्ट पर महिला समिति का विरोध

rakesh nandan

17/04/2026

शिमला में कमला नेहरू अस्पताल की गायनी ओपीडी को आईजीएमसी शिमला स्थानांतरित करने के सरकार के निर्णय का विरोध तेज हो गया है। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने इस फैसले की कड़ी निंदा करते हुए सरकार से तत्काल आदेश वापस लेने की मांग की है।

महिला समिति का कहना है कि यह निर्णय न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि इससे महिला मरीजों को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ेगा। समिति के अनुसार, हाल ही में सामने आए हालातों से यह स्पष्ट हो गया है कि आईजीएमसी में आवश्यक सुविधाओं का अभाव है। पिछले दिन तय किए गए ऑपरेशन भी अंततः कमला नेहरू अस्पताल में ही करने पड़े, जबकि ओपीडी सेवाएं भी वहीं संचालित की गईं।

समिति ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन द्वारा आज भी गायनी से संबंधित पर्चियां कमला नेहरू अस्पताल में ही काटी गईं और वरिष्ठ चिकित्सक भी वहीं उपलब्ध रहे। इससे यह स्पष्ट होता है कि आईजीएमसी में अभी तक ऐसी व्यवस्था विकसित नहीं हो पाई है, जहां इस तरह की सेवाएं सुचारू रूप से दी जा सकें।

महिला समिति ने मुख्यमंत्री के सलाहकार के उस बयान पर भी सवाल उठाए, जिसमें कहा गया था कि महिलाओं को एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। समिति का कहना है कि यह दावा वास्तविकता से परे है, क्योंकि कमला नेहरू अस्पताल में पहले से ही ब्लड बैंक और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। यदि मरीजों को आईजीएमसी भेजा जाता है, तो उन्हें विभिन्न जांचों के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाना पड़ेगा और लंबी कतारों में इंतजार करना होगा।

समिति ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में भारी-भरकम यूजर चार्जेज लागू कर दिए हैं, जिससे आम लोगों के लिए इलाज महंगा हो गया है। इसके बावजूद सरकार बेहतर सुविधाएं देने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि यदि मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, तो यह नीति पूरी तरह से असफल साबित हो रही है।

जनवादी महिला समिति ने सुझाव दिया कि सरकार को कमला नेहरू अस्पताल में ही तीसरे चरण के भवन का निर्माण करना चाहिए। इसी भवन में आधुनिक सुविधाएं जैसे आईवीएफ केंद्र और रोबोटिक सर्जरी की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि महिलाओं को एक ही स्थान पर सभी सुविधाएं मिल सकें और उन्हें इधर-उधर भटकना न पड़े।

समिति ने यह भी कहा कि पिछले 102 वर्षों से कमला नेहरू अस्पताल में महिलाओं का उपचार किया जा रहा है और यह संस्थान महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक विश्वसनीय केंद्र रहा है। ऐसे में बिना उचित तैयारी के ओपीडी को स्थानांतरित करना उचित नहीं है।

उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस निर्णय को वापस नहीं लिया गया, तो जनवादी महिला समिति अपने आंदोलन को और तेज करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल एक अस्पताल का नहीं, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य और अधिकारों से जुड़ा हुआ है।

अंत में समिति ने सरकार से पुनर्विचार करने और महिला मरीजों की सुविधा को प्राथमिकता देने की अपील की है। उनका कहना है कि किसी भी निर्णय को लागू करने से पहले जमीनी स्थिति का आकलन करना आवश्यक है, ताकि जनता को असुविधा का सामना न करना पड़े।