हिमाचल प्रदेश में कथित चेस्टर हिल भूमि घोटाले को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी (CPI(M)) की राज्य कमेटी ने इस मुद्दे पर शिमला के कॉम्बरमेयर होटल में एक प्रेस वार्ता आयोजित कर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
पार्टी ने सोलन स्थित लगभग 275 बीघा भूमि से जुड़े कथित सैकड़ों करोड़ रुपये के चेस्टर हिल घोटाले को प्रदेश का बड़ा मामला बताते हुए इसमें उच्च स्तर की संलिप्तता का आरोप लगाया है। पार्टी ने विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्हें तत्काल पद से हटाने की मांग की है।
प्रेस वार्ता में पार्टी के राज्य सचिव संजय चौहान, राज्य सचिव मंडल सदस्य डॉ कुलदीप सिंह तंवर और विजेंद्र मेहरा उपस्थित रहे। नेताओं ने संयुक्त रूप से आरोप लगाया कि इतने बड़े घोटाले में कथित संलिप्तता के बावजूद मुख्य सचिव को पद से न हटाना सरकार की भूमिका पर सवाल खड़ा करता है।
CPI(M) नेताओं ने कहा कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।
पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार इस मामले की गंभीरता को कम करने का प्रयास कर रही है। नेताओं के अनुसार, मुख्यमंत्री द्वारा इसे अधिकारियों के बीच आपसी खींचतान बताना उचित नहीं है और इससे जनता में गलत संदेश जा रहा है।
प्रेस वार्ता में यह भी कहा गया कि संबंधित अधिकारी पर पूर्व में भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग चुके हैं और उनकी संपत्ति में पिछले कुछ वर्षों में अत्यधिक वृद्धि हुई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश और पंजाब में खरीदी गई कई संपत्तियां बाजार मूल्य से बहुत कम कीमत पर ली गई हैं, जो गंभीर जांच का विषय है।
CPI(M) ने यह भी आरोप लगाया कि नगर निगम सोलन के आयुक्त, एसडीएम और तहसीलदार द्वारा की गई जांचों को नजरअंदाज करते हुए मुख्य सचिव द्वारा क्लीन चिट देना पूरे मामले को संदिग्ध बनाता है। उन्होंने कहा कि यह कदम नगर निगम अधिनियम 1994 और भू-राजस्व अधिनियम 1972 के प्रावधानों का उल्लंघन प्रतीत होता है।
पार्टी ने धारा 118 को कमजोर किए जाने का भी आरोप लगाया और कहा कि इससे प्रदेश में भू-माफिया को बढ़ावा मिल रहा है। नेताओं का कहना है कि नौकरशाही, ठेकेदारों, रियल एस्टेट और राजनीतिक वर्ग के गठजोड़ के कारण बेनामी सौदे हो रहे हैं और किसानों की जमीनें कम कीमत पर खरीदी जा रही हैं।
CPI(M) ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में पारदर्शी जांच नहीं की गई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो पार्टी प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सचिवालय, छोटा शिमला का घेराव किया जाएगा।
पार्टी नेताओं ने कहा कि यह मामला केवल एक घोटाले का नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की भूमि और किसानों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पारदर्शी जांच करवाई जाए और दोषियों को कानून के तहत सजा दी जाए।
अंत में, CPI(M) ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार इस मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाती, तो पार्टी जनता को साथ लेकर सड़कों पर उतरेगी और आंदोलन को तेज करेगी।