गोहर महाविद्यालय में विश्व मधुमक्खी दिवस मनाया गया

rakesh nandan

21/05/2026

गोहर महाविद्यालय में विश्व मधुमक्खी दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

विश्व मधुमक्खी दिवस के अवसर पर डॉ. वाई. एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय गोहर, गुडाहरी में बुधवार को पोस्टर प्रदर्शनी एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं आमजन को मधुमक्खियों के संरक्षण, जैव विविधता तथा पर्यावरण संतुलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति जागरूक करना रहा।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और मधुमक्खियों के महत्व से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों ने पोस्टर प्रदर्शनी के माध्यम से मधुमक्खियों की उपयोगिता, परागण प्रक्रिया, कृषि उत्पादन तथा पर्यावरण संरक्षण में उनकी भूमिका को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया। वहीं भाषण प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने मधुमक्खियों के संरक्षण की आवश्यकता तथा इनके घटते अस्तित्व से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को विस्तार से रखा।

कार्यक्रम समन्वयक एवं कीट विज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. मंजू देवी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मधुमक्खियां केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कृषि उत्पादन एवं खाद्य सुरक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि फसलों के परागण में मधुमक्खियों की अहम भूमिका होती है, जिसके बिना कृषि उत्पादन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शोधों के अनुसार विश्व की बड़ी संख्या में खाद्य फसलें परागण के लिए मधुमक्खियों और अन्य परागणकर्ताओं पर निर्भर करती हैं। यदि मधुमक्खियों की संख्या में लगातार कमी आती रही तो इसका सीधा असर खाद्य उत्पादन और पर्यावरण संतुलन पर पड़ेगा। इसलिए इनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

डॉ. मंजू देवी ने विद्यार्थियों को जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने का संदेश देते हुए कहा कि रासायनिक कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग, प्रदूषण और प्राकृतिक आवासों का नष्ट होना मधुमक्खियों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाएं तथा अपने स्तर पर मधुमक्खियों के संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाएं।

उन्होंने यह भी कहा कि मधुमक्खियां पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पौधों के परागण के माध्यम से वे जैव विविधता को बनाए रखने में मदद करती हैं। यही कारण है कि आज पूरी दुनिया में मधुमक्खियों के संरक्षण को लेकर विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने “सेव द बीज”, “प्रोटेक्ट पोलिनेटर्स” और “ग्रीन एनवायरनमेंट” जैसे विषयों पर आकर्षक पोस्टर तैयार किए। कई विद्यार्थियों ने अपने भाषणों में मधुमक्खियों के संरक्षण को मानव जीवन और खाद्य सुरक्षा से जोड़ते हुए इसे समय की आवश्यकता बताया।

महाविद्यालय प्रशासन ने बताया कि इस प्रकार के कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवाओं को प्रकृति संरक्षण और सतत विकास के प्रति जागरूक किया जा सकता है।

विश्व मधुमक्खी दिवस हर वर्ष 20 मई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मधुमक्खियों और अन्य परागणकर्ताओं के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा उनके संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा भी मधुमक्खियों के संरक्षण को पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को मधुमक्खियों के संरक्षण और स्वच्छ एवं सतत पर्यावरण निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की शपथ भी दिलाई गई। महाविद्यालय प्रशासन ने उम्मीद जताई कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम भविष्य में भी विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करते रहेंगे।