ऊना की सभी पंचायतों में 5 जून को विशेष ग्राम सभाएं

rakesh nandan

03/06/2026

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिला ऊना की सभी ग्राम पंचायतों में 5 जून को विशेष ग्राम सभा बैठकों का आयोजन किया जाएगा। जिला प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और सतत विकास को जन आंदोलन बनाने के उद्देश्य से यह पहल की है। इस संबंध में जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त Jatin Lal द्वारा आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।

उपायुक्त जतिन लाल ने बताया कि इन विशेष ग्राम सभा बैठकों का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सहभागिता और जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली इन बैठकों में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। ग्राम पंचायत स्तर पर लोगों को स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

विशेष ग्राम सभाओं में ठोस एवं प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते प्लास्टिक उपयोग और कचरे के अनुचित निपटान से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसे रोकने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

बैठकों के दौरान कचरे के पृथक्करण यानी वेस्ट सेग्रीगेशन के महत्व पर चर्चा की जाएगी। ग्रामीणों को बताया जाएगा कि घरों में उत्पन्न होने वाले सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग रखने से उसके वैज्ञानिक निपटान और पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है।

इसके साथ ही एकल उपयोग वाले प्लास्टिक (सिंगल यूज प्लास्टिक) के प्रयोग को कम करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। ग्राम सभाओं में लोगों को कपड़े या अन्य पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि प्लास्टिक प्रदूषण को कम किया जा सके।

जैविक कचरे से कम्पोस्ट तैयार करने की प्रक्रिया और उसके लाभों के बारे में भी ग्रामीणों को जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि घरों और खेतों से निकलने वाले जैविक कचरे का उपयोग खाद बनाने में किया जा सकता है, जिससे कचरा प्रबंधन के साथ-साथ कृषि उत्पादन में भी लाभ मिलता है।

ग्राम सभाओं में गांवों, सार्वजनिक स्थलों और जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने पर भी चर्चा होगी। प्रशासन चाहता है कि लोग अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने के लिए नियमित रूप से स्वच्छता गतिविधियों में भाग लें और सामुदायिक जिम्मेदारी निभाएं।

उपायुक्त ने बताया कि ग्राम पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों (SHG), स्वच्छाग्रहियों, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं, महिला मंडलों और युवा मंडलों की भूमिका इस अभियान में महत्वपूर्ण रहेगी। इन सभी हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि ग्राम सभाएं केवल चर्चा का मंच नहीं हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर विकास और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सामूहिक निर्णय लेने का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। इसलिए पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर ग्राम सभाओं में लिए गए निर्णयों का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

जतिन लाल ने जिला के सभी ग्रामीण नागरिकों से इन बैठकों में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता से जुड़े प्रयास तभी सफल हो सकते हैं जब समाज का प्रत्येक वर्ग इसमें अपनी भूमिका निभाए।

उन्होंने कहा कि स्वच्छ, स्वस्थ और हरित गांवों का निर्माण सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर छोटे-छोटे कदम उठाए तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़े परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

जिला प्रशासन का मानना है कि विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित ये विशेष ग्राम सभाएं ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सतत विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इन बैठकों के माध्यम से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी आधारित अभियान के रूप में मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।