ऊना में रैगिंग केस पर एबीवीपी का विरोध

rakesh nandan

18/04/2026

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के पंडोगा स्थित केसी ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूट में सामने आए रैगिंग और छात्र के साथ मारपीट के मामले ने पूरे प्रदेश में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। इस घटना को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे शिक्षा व्यवस्था और छात्र सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, संस्थान के हॉस्टल में रह रहे एक छात्र के साथ रैगिंग के नाम पर अभद्र व्यवहार किया गया और उसके साथ मारपीट भी की गई। यह घटना न केवल मानवता के खिलाफ है, बल्कि यह दर्शाती है कि आज भी कुछ शिक्षण संस्थानों में रैगिंग जैसी कुप्रथा पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाई है।

एबीवीपी ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि शिक्षा संस्थान केवल पढ़ाई का स्थान नहीं होते, बल्कि वे छात्रों के व्यक्तित्व निर्माण और सुरक्षित भविष्य की नींव रखते हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाएं पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती हैं और छात्रों के बीच भय का वातावरण पैदा करती हैं।

संस्थान प्रबंधन द्वारा आरोपी छात्र को निष्कासित करने और पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करने को एबीवीपी ने एक सकारात्मक कदम बताया, लेकिन संगठन का मानना है कि यह कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। एबीवीपी ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि सभी दोषियों की पहचान हो सके और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सके।

इस विषय पर एबीवीपी के प्रदेश सह मंत्री अभी ठाकुर ने कहा कि रैगिंग जैसी अमानवीय कुप्रथा के लिए किसी भी शिक्षण संस्थान में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल अनुशासनहीनता का मामला नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक बुराई है, जो छात्रों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालती है।

उन्होंने “जीरो टॉलरेंस” नीति लागू करने की मांग करते हुए कहा कि सभी शिक्षण संस्थानों में एंटी-रैगिंग नियमों का सख्ती से पालन होना चाहिए। इसके लिए संस्थानों में सक्रिय एंटी-रैगिंग समितियों का गठन, नियमित निगरानी और छात्रों के बीच जागरूकता कार्यक्रम चलाना आवश्यक है।

एबीवीपी ने प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें भी रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई, सभी शिक्षण संस्थानों में एंटी-रैगिंग कानूनों का कठोर पालन, हॉस्टल और कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, पीड़ित छात्र को मानसिक व शैक्षणिक सहायता देना तथा हेल्पलाइन और काउंसलिंग व्यवस्था को प्रभावी बनाना शामिल है।

संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इस मामले में किसी प्रकार की लापरवाही बरती गई, तो वह छात्र हितों की रक्षा के लिए आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगा।

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में भी रैगिंग जैसी समस्याएं क्यों बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका सख्ती से पालन और सामाजिक स्तर पर जागरूकता भी जरूरी है।

अंत में, एबीवीपी ने यह स्पष्ट किया कि वह सदैव छात्र हितों, सुरक्षित शिक्षण वातावरण और अनुशासित शैक्षणिक संस्कृति के लिए प्रतिबद्ध है। इस मामले में भी संगठन पीड़ित छात्र के साथ खड़ा है और उसे न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।