स्वारघाट में MSME और SHG के लिए डिजिटल कार्यशाला आयोजित

rakesh nandan

06/06/2026

स्वारघाट में MSME और स्वयं सहायता समूहों के लिए डिजिटल साक्षरता एवं GeM कार्यशाला आयोजित

बिलासपुर। ग्रामीण क्षेत्रों के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) तथा स्वयं सहायता समूहों (SHG) को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने और उनके व्यवसायिक विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से उद्योग विभाग द्वारा स्वारघाट में एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला रैम्प (RAMP – Raising and Accelerating MSME Performance) कार्यक्रम के तहत सरकारी विश्राम गृह, स्वारघाट में आयोजित की गई।

जिला उद्योग केंद्र बिलासपुर के महाप्रबंधक मनोज कुमार ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्थानीय उद्यमियों, महिला स्वयं सहायता समूहों और लघु व्यवसाय संचालकों को डिजिटल तकनीकों, वित्तीय प्रबंधन और सरकारी खरीद प्रणाली से जोड़ना था। उन्होंने कहा कि बदलते कारोबारी परिवेश में डिजिटल तकनीक छोटे उद्योगों के लिए विकास और विस्तार के नए अवसर प्रदान कर रही है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यवसाय संचालन, विपणन और ग्राहक संपर्क की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक प्रभावी और आसान हो गई है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के उद्यमियों को इन तकनीकों से जोड़ना आवश्यक है ताकि वे प्रतिस्पर्धी बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकें।

कार्यशाला में 30 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें विभिन्न स्वयं सहायता समूहों की महिला सदस्याएं, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमी तथा स्थानीय व्यवसायी शामिल रहे। प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया ताकि वे सीखी गई जानकारी का सीधे अपने व्यवसाय में उपयोग कर सकें।

कार्यशाला के पहले सत्र में डिजिटल व्यवसाय प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रसार अधिकारी (उद्योग) सदर एवं प्रशिक्षक प्रकाश बंसल, रैम्प कार्यक्रम की वरिष्ठ सलाहकार संगीता सोनी, सलाहकार संस्कृति शर्मा तथा आशुतोष ने प्रतिभागियों को डिजिटल कारोबार के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया।

विशेषज्ञों ने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप बिजनेस, डिजिटल भुगतान प्रणाली और ऑनलाइन मार्केटिंग टूल्स का प्रभावी उपयोग करके छोटे उद्यम अपने उत्पादों और सेवाओं को अधिक व्यापक बाजार तक पहुंचा सकते हैं। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्राहकों से जुड़ने, ब्रांड पहचान मजबूत करने और बिक्री बढ़ाने के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी।

इसके अलावा प्रतिभागियों को वित्तीय प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने बजट निर्माण, नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) प्रबंधन, बैंकिंग सेवाओं के बेहतर उपयोग और विभिन्न सरकारी वित्तीय सहायता योजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि मजबूत वित्तीय योजना किसी भी व्यवसाय की सफलता का आधार होती है।

कार्यशाला के दूसरे सत्र में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि GeM भारत सरकार का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से MSME, स्टार्टअप और स्वयं सहायता समूह सीधे सरकारी विभागों को अपने उत्पाद और सेवाएं उपलब्ध करा सकते हैं।

प्रतिभागियों को बताया गया कि GeM पोर्टल के माध्यम से उन्हें पारदर्शी खरीद प्रक्रिया, समय पर भुगतान और देशभर के सरकारी खरीदारों तक पहुंच प्राप्त होती है। इससे छोटे उद्यमों और महिला समूहों को अपने व्यवसाय का विस्तार करने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने में सहायता मिलती है।

कार्यशाला का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण ऑन-द-स्पॉट GeM पंजीकरण एवं ऑनबोर्डिंग अभियान रहा। इस दौरान कई महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों की सदस्याओं ने मौके पर ही विक्रेता के रूप में अपना पंजीकरण करवाया। इससे प्रतिभागियों को सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कारोबार शुरू करने का अवसर मिला।

विभागीय अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को GeM पोर्टल के उपयोग से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया। उन्होंने पंजीकरण प्रक्रिया, उत्पाद सूचीकरण, दस्तावेज अपलोड करने और सरकारी निविदाओं में भाग लेने से संबंधित तकनीकी समस्याओं का समाधान किया।

महाप्रबंधक मनोज कुमार ने कहा कि उद्योग विभाग भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के उद्यमी डिजिटल युग की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक और सरकारी ई-मार्केट प्लेटफॉर्म का उपयोग कर छोटे व्यवसाय भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान स्थापित कर सकते हैं।

कार्यशाला में प्रशिक्षक प्रकाश बंसल, वरिष्ठ सलाहकार संगीता सोनी, सलाहकार संस्कृति शर्मा, आशुतोष सहित अनेक महिला उद्यमी, स्वयं सहायता समूहों की सदस्याएं और स्थानीय व्यवसायी उपस्थित रहे।