आईएचबीटी हिमालयी अर्थव्यवस्था को देगा नई दिशा: सुरेश कश्यप

rakesh nandan

29/05/2026

आईएचबीटी हिमालयी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में सक्षम: सुरेश कश्यप

पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद Suresh Kashyap ने केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Dr. Jitendra Singh के पालमपुर स्थित CSIR-Institute of Himalayan Bioresource Technology (आईएचबीटी) दौरे का स्वागत करते हुए कहा है कि यह संस्थान केवल हिमाचल प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे हिमालयी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आईएचबीटी द्वारा किए जा रहे कार्य भविष्य में प्रदेश के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।

सुरेश कश्यप ने कहा कि डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा आईएचबीटी की वैज्ञानिक उपलब्धियों, अनुसंधान परियोजनाओं, स्टार्टअप्स और स्वदेशी उत्पाद विकास की सराहना इस बात का प्रमाण है कि केंद्र सरकार हिमालयी राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विज्ञान आधारित विकास मॉडल को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान संस्थानों को सशक्त बनाकर सरकार स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश में अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसका लाभ युवाओं, किसानों और उद्यमियों को मिल रहा है। आईएचबीटी जैसे संस्थान इस परिवर्तन के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं, जो स्थानीय संसाधनों को वैश्विक अवसरों में बदलने की क्षमता रखते हैं।

सुरेश कश्यप ने कहा कि आईएचबीटी द्वारा संचालित अरोमा मिशन, फ्लोरीकल्चर, औषधीय एवं सुगंधित पौधों के संवर्धन, जैव प्रौद्योगिकी तथा कृषि आधारित अनुसंधान कार्यक्रमों ने किसानों और बागवानों के लिए नई संभावनाएं पैदा की हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ आय बढ़ाने वाले वैकल्पिक विकल्प उपलब्ध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे स्वरोजगार और उद्यमिता को भी बढ़ावा मिल रहा है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध हो रहा है।

उन्होंने विशेष रूप से हाल ही में हुए 12 प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों को हिमाचल प्रदेश और देश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनके अनुसार इन समझौतों के माध्यम से अनुसंधान प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों का लाभ सीधे उद्योगों, किसानों और आम नागरिकों तक पहुंचेगा। इससे वैज्ञानिक अनुसंधान का वास्तविक लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए “लैब टू लैंड” और “लैब टू मार्केट” के विजन को साकार करने में ऐसे प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जब प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकें किसानों और उद्योगों तक पहुंचती हैं, तब उनका प्रत्यक्ष प्रभाव उत्पादन, आय और रोजगार पर दिखाई देता है। यही मॉडल आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

सुरेश कश्यप ने कहा कि हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक और जैविक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। यहां औषधीय पौधों, सुगंधित फसलों, बागवानी और जैविक कृषि की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यदि वैज्ञानिक संस्थानों, किसानों और उद्योगों के बीच सहयोग को और मजबूत किया जाए तो राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि आईएचबीटी द्वारा किए जा रहे अनुसंधान कार्य आने वाले वर्षों में हिमालयी अर्थव्यवस्था के मजबूत आधार स्तंभ सिद्ध होंगे। संस्थान की वैज्ञानिक उपलब्धियां न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए लाभकारी साबित होंगी। उन्होंने कहा कि अनुसंधान और नवाचार आधारित विकास मॉडल ही भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार बनने जा रहा है।

सुरेश कश्यप ने डॉ. जितेंद्र सिंह, सीएसआईआर और आईएचबीटी के वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से हिमाचल प्रदेश विज्ञान, अनुसंधान, जैविक कृषि, स्टार्टअप और नवाचार के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में आईएचबीटी किसानों, युवाओं, शोधकर्ताओं और उद्यमियों के लिए अवसरों का एक बड़ा केंद्र बनेगा।

उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक के माध्यम से हिमालयी क्षेत्रों के विकास की जो नई राह तैयार की जा रही है, वह विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगी। आईएचबीटी जैसे संस्थान स्थानीय क्षमता को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ रोजगार और आर्थिक विकास के नए आयाम स्थापित करेंगे।