सिरमौर में पंचायत चुनावों को लेकर सभाओं, जुलूसों और मनोरंजन कार्यक्रमों पर प्रतिबंध
पंचायती राज संस्था चुनाव-2026 को लेकर जिला प्रशासन सिरमौर ने महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी करते हुए सार्वजनिक सभाओं, जुलूसों और मनोरंजन कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त सिरमौर प्रियंका वर्मा द्वारा जारी आदेशों के अनुसार यह प्रतिबंध संबंधित पंचायत क्षेत्रों में मतदान समाप्ति के लिए निर्धारित समय से 48 घंटे पहले प्रभावी रहेगा।
जिला प्रशासन द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 158 (बी) के तहत चुनाव से संबंधित किसी भी प्रकार की सार्वजनिक सभा, जुलूस अथवा सार्वजनिक बैठक आयोजित करने की अनुमति नहीं होगी। प्रशासन का उद्देश्य पंचायत चुनावों को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न करवाना है।
उपायुक्त प्रियंका वर्मा ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। चुनाव के अंतिम चरणों में अनावश्यक भीड़, प्रचार गतिविधियों और शोर-शराबे को नियंत्रित करने के लिए यह प्रतिबंध लगाया गया है।
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि सिनेमैटोग्राफी, टेलीविजन अथवा अन्य किसी भी माध्यम से चुनाव प्रचार-प्रसार करने पर भी रोक रहेगी। प्रशासन का कहना है कि मतदान से 48 घंटे पहले का समय “शांत अवधि” माना जाता है, जिसका उद्देश्य मतदाताओं को बिना किसी दबाव या प्रभाव के स्वतंत्र रूप से मतदान करने का अवसर देना है।
इसके अलावा लोगों को आकर्षित करने के उद्देश्य से किसी भी प्रकार के म्यूजिकल कॉन्सर्ट, थिएटर प्रदर्शन अथवा अन्य मनोरंजन कार्यक्रमों के आयोजन पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकते हैं और कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न कर सकते हैं।
उपायुक्त प्रियंका वर्मा ने कहा कि चुनाव आयोग और प्रशासन निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। सभी राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और आम नागरिकों से चुनाव संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत कार्रवाई की जाएगी। अधिनियम के अनुसार नियमों का उल्लंघन करने पर दो साल तक की सजा, जुर्माना अथवा दोनों दंड लागू हो सकते हैं।
प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों और पुलिस विभाग को चुनाव अवधि के दौरान विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी तथा किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रशासन का कहना है कि पंचायत चुनाव ग्रामीण लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसलिए यह आवश्यक है कि चुनावी वातावरण शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बना रहे। मतदाताओं को स्वतंत्र एवं भयमुक्त वातावरण में मतदान का अवसर उपलब्ध करवाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मतदान से 48 घंटे पहले प्रचार गतिविधियों पर रोक लगाने का उद्देश्य मतदाताओं को सोच-समझकर निर्णय लेने का अवसर देना है। इससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने में सहायता मिलती है।
उपायुक्त ने सभी उम्मीदवारों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं से संयम बनाए रखने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि चुनाव लोकतंत्र का महापर्व है और इसे शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न करवाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
जिला प्रशासन ने लोगों से भी अफवाहों से दूर रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत प्रशासन या पुलिस को देने का आग्रह किया है। प्रशासन ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जाएगी ताकि भ्रामक जानकारी फैलाने वालों पर कार्रवाई की जा सके।
प्रियंका वर्मा ने भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन पंचायत चुनावों को पूर्ण पारदर्शिता, निष्पक्षता और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न करवाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए चुनाव संबंधी नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।