श्रमिकों के बच्चों को 1.20 लाख तक छात्रवृत्ति का लाभ

rakesh nandan

04/06/2026

हिमाचल प्रदेश सरकार श्रमिकों और उनके परिवारों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है। इन्हीं प्रयासों के तहत Himachal Pradesh Building and Other Construction Workers Welfare Board हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड द्वारा पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने और उनकी उच्च शिक्षा के सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

जिला सिरमौर में जिला कामगार कल्याण कार्यालय के माध्यम से इस योजना का सफल क्रियान्वयन किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत श्रमिक परिवारों के अधिकतम दो बच्चों को छात्रवृत्ति का लाभ प्रदान किया जाता है, ताकि वे आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।

स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक सहायता

छात्रवृत्ति योजना के तहत विभिन्न शैक्षणिक स्तरों के लिए अलग-अलग वित्तीय सहायता निर्धारित की गई है। पहली से आठवीं कक्षा तक अध्ययनरत विद्यार्थियों को 8,400 रुपये प्रतिवर्ष की सहायता दी जाती है। वहीं नौवीं से बारहवीं कक्षा तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों को 12,000 रुपये प्रतिवर्ष प्रदान किए जाते हैं।

उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए स्नातक स्तर पर कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय अथवा समकक्ष पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को 36,000 रुपये प्रतिवर्ष की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। स्नातकोत्तर स्तर पर अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों को 60,000 रुपये प्रतिवर्ष तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जाती है।

डिप्लोमा और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को भी प्रोत्साहन

योजना के अंतर्गत एक वर्षीय, द्विवर्षीय और तीन वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को 48,000 रुपये प्रतिवर्ष की सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा पॉलीटेक्निक डिप्लोमा कर रहे विद्यार्थियों को 60,000 रुपये प्रतिवर्ष तक की छात्रवृत्ति दी जाती है।

मेडिकल, इंजीनियरिंग, पीएचडी तथा अन्य व्यावसायिक और अनुसंधान आधारित पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए यह योजना और भी लाभकारी है। ऐसे विद्यार्थियों को 1.20 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है, जिससे वे आर्थिक बाधाओं के बिना अपनी उच्च शिक्षा पूरी कर सकें।

संध्या ठाकुर को मिला शिक्षा का नया संबल

जिला सिरमौर के जोगीवन क्षेत्र की निवासी Sandhya Thakur संध्या ठाकुर इस योजना से लाभान्वित होने वाले विद्यार्थियों में शामिल हैं। उन्होंने जमा दो की शिक्षा पूर्ण करने के बाद कंप्यूटर डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लिया।

संध्या के परिवार को छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 48,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। उन्होंने बताया कि इस सहायता से उनकी पढ़ाई जारी रखने में काफी मदद मिली और उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक चिंताएं काफी हद तक कम हुईं। उन्होंने इस योजना के लिए प्रदेश सरकार और कामगार कल्याण बोर्ड का आभार व्यक्त किया।

निकिता और अंजली को भी मिला लाभ

नाहन तहसील के ग्राम धौण की निवासी Nikita Thakur निकिता ठाकुर ने वर्ष 2022 से 2025 के दौरान Government Post Graduate College Nahan राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नाहन से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

निकिता को छात्रवृत्ति योजना के तहत कुल 72,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि यह सहायता उनकी उच्च शिक्षा पूरी करने में महत्वपूर्ण साबित हुई और इससे आर्थिक बोझ काफी कम हुआ।

इसी प्रकार ग्राम धौण की ही Anjali अंजली को भी छात्रवृत्ति योजना के तहत 72,000 रुपये की सहायता मिली। इस वित्तीय सहयोग से उन्होंने अपनी स्नातक शिक्षा सफलतापूर्वक पूरी की और अप्रैल 2026 में अंतिम वर्ष की परीक्षा दी। अंजली ने कहा कि यह योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

75 विद्यार्थियों को मिला लाभ

जिला कामगार कल्याण अधिकारी Paritosh Tomar पारितोष तोमर ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जिला सिरमौर में अब तक 75 पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति योजना का लाभ प्रदान किया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि इन लाभार्थियों पर अब तक 21.41 लाख रुपये की राशि व्यय की जा चुकी है। उन्होंने सभी पात्र श्रमिक परिवारों से इस योजना का अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह किया, ताकि उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य मिल सके।

शिक्षा के माध्यम से सशक्तिकरण

छात्रवृत्ति योजना न केवल आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, बल्कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। सरकार की यह पहल उन परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है, जो आर्थिक सीमाओं के बावजूद अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का सपना देखते हैं।