शिमला ग्रीष्मोत्सव 2026 में सजा हिंदी कवि सम्मेलन, 50 कवियों ने बिखेरे साहित्य के रंग
अंतर्राष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव-2026 के प्रथम दिन ऐतिहासिक गेयटी थिएटर साहित्यिक गतिविधियों का केंद्र बना रहा। ग्रीष्मोत्सव के अंतर्गत आयोजित हिंदी कवि सम्मेलन में प्रदेश के लगभग 50 नामित कवियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई और अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्य प्रेमियों को एक समृद्ध एवं प्रेरणादायक अनुभव प्रदान किया। कार्यक्रम ने न केवल साहित्यिक वातावरण को नई ऊर्जा दी, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को भी मंच प्रदान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (प्रोटोकॉल) ज्योति राणा ने की। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए कवियों और साहित्यकारों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया तथा उनके योगदान की सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव के इतिहास में पहली बार 8 से 10 जून तक विशेष रूप से कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन किया जा रहा है। यह पहल प्रदेश के साहित्यकारों के लिए सम्मान और गौरव का विषय है।
ज्योति राणा ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज की भावनाओं, विचारों और वास्तविकताओं को अभिव्यक्त करते हैं। उन्होंने प्रदेश के साहित्यकारों से आग्रह किया कि वे अपनी सृजनात्मक प्रतिभा के माध्यम से हिमाचल की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को और अधिक समृद्ध बनाएं।
ग्रीष्मोत्सव के तहत 8 जून से 10 जून तक हिंदी कवि सम्मेलन, पहाड़ी कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन किया जा रहा है। इसी श्रृंखला में पहले दिन हिंदी कवि सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए साहित्यकारों और कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार एस.आर. हरनोट ने किया, जबकि मंच संचालन का दायित्व डॉ. सत्यनारायण स्नेही ने निभाया। दोनों साहित्यकारों ने कार्यक्रम को प्रभावी और रोचक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हिंदी कवि सम्मेलन का पहला सत्र प्रातः 10 बजे आरंभ हुआ। इस सत्र में अध्यक्षीय मंडल में प्रख्यात साहित्यकार डॉ. ओम प्रकाश सारस्वत, वरिष्ठ लेखिका डॉ. रेखा वशिष्ठ तथा प्रोफेसर मीनाक्षी एफ. पॉल उपस्थित रहीं। अध्यक्षीय मंडल के सदस्यों ने साहित्य की वर्तमान स्थिति, रचनात्मक अभिव्यक्ति और साहित्यिक मूल्यों पर अपने विचार साझा किए।
दूसरा सत्र दोपहर 2 बजे आयोजित किया गया, जिसमें के.आर. भारती, डॉ. भवानी सिंह, आत्मा रंजन तथा डॉ. दिनेश कंवर अध्यक्षीय मंडल में शामिल रहे। इस सत्र का संचालन डॉ. दिनेश शर्मा द्वारा किया गया। विभिन्न कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से सामाजिक सरोकारों, प्रकृति, संस्कृति, मानवीय संवेदनाओं और समकालीन विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
कवि सम्मेलन में प्रस्तुत रचनाओं ने श्रोताओं को भावनात्मक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर जोड़ने का कार्य किया। कई कविताओं में हिमाचल की लोक संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और सामाजिक परिवर्तनों की झलक देखने को मिली। वहीं कुछ कवियों ने वर्तमान समय की चुनौतियों और समाज में हो रहे बदलावों को भी अपनी रचनाओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित साहित्य प्रेमियों ने कवियों की प्रस्तुतियों की सराहना की। गेयटी थिएटर का वातावरण पूरे दिन साहित्यिक ऊर्जा और रचनात्मक अभिव्यक्तियों से सराबोर रहा। कवियों और श्रोताओं के बीच संवाद ने कार्यक्रम को और अधिक जीवंत बना दिया।
आयोजकों के अनुसार ग्रीष्मोत्सव के आगामी दिनों में पहाड़ी कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन भी किया जाएगा, जिससे प्रदेश के साहित्य और भाषा की विविधता को मंच मिलेगा। यह आयोजन युवा रचनाकारों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान कर रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साहित्य, कला और संस्कृति के विभिन्न आयामों को भी प्रोत्साहित करता है। हिंदी कवि सम्मेलन का सफल आयोजन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
प्रदेश के लगभग 50 कवियों की भागीदारी वाला यह आयोजन हिमाचल की साहित्यिक चेतना को नई पहचान देने के साथ-साथ साहित्य प्रेमियों के लिए भी एक यादगार अवसर बन गया। गेयटी थिएटर में सजा यह साहित्यिक समारोह शिमला ग्रीष्मोत्सव 2026 की प्रमुख आकर्षणों में से एक रहा।