अंतर्राष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव-2026 के अंतर्गत आयोजित किए जा रहे शिमला पहाड़ी स्वाद महोत्सव के तहत पाक कला प्रतियोगिता (Culinary Competition) का सफल आयोजन आईएचएम शिमला (कुफरी) में किया गया। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश की समृद्ध पाक विरासत, पारंपरिक व्यंजनों और स्थानीय खाद्य संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना था।
प्रतियोगिता का आयोजन संस्थान के प्रधानाचार्य डॉ. मुकुल डिमरी के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों ने अपने पाक-कौशल का प्रदर्शन करते हुए पारंपरिक हिमाचली व्यंजनों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। आयोजन के दौरान स्थानीय खाद्य संस्कृति और क्षेत्रीय स्वादों को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम में अतिरिक्त उपायुक्त शिमला Sachin Sharma मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा प्रदर्शित पाक-कौशल, नवाचार और पारंपरिक व्यंजनों के संरक्षण के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि हिमाचल की खाद्य परंपराएं राज्य की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और ऐसे आयोजन इन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक व्यंजनों को आधुनिक प्रस्तुति के साथ सामने लाने से स्थानीय उत्पादों को बाजार मिल सकता है और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है। इसके साथ ही स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं।
प्रतियोगिता के सफल संचालन और मूल्यांकन के लिए आईएचएम शिमला की ओर से प्रशांत विजेता, विभागाध्यक्ष तथा यथार्थ चौहान, वरिष्ठ प्रवक्ता को समन्वयक एवं निर्णायक नियुक्त किया गया था। इसके अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के सेवानिवृत्त महाप्रबंधक नंद लाल ने भी निर्णायक मंडल में शामिल होकर प्रतियोगिता के मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों ने हिमाचल के पारंपरिक व्यंजनों के साथ-साथ आधुनिक प्रस्तुति और नवाचार का भी शानदार प्रदर्शन किया। निर्णायकों ने व्यंजनों के स्वाद, प्रस्तुतीकरण, मौलिकता, स्वच्छता और तकनीकी दक्षता के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया।
निर्णायक मंडल ने विशेष रूप से स्थानीय सामग्री के प्रभावी उपयोग और पारंपरिक व्यंजनों की प्रामाणिकता की सराहना की। उन्होंने कहा कि हिमाचल के स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक रेसिपियों को संरक्षित करना प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
प्रतियोगिता में कुल 30 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें स्वयं सहायता समूहों, ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े समूहों तथा स्वतंत्र प्रतिभागियों ने अपनी पाक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता का स्तर काफी ऊंचा रहा और प्रतिभागियों ने स्थानीय व्यंजनों को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत कर निर्णायकों को प्रभावित किया।
कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद कुल 13 प्रतिभागियों का चयन अगले चरण के लिए किया गया। चयनित प्रतिभागियों में 5 स्वयं सहायता समूह राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से, 1 समूह राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (NULM) से तथा 7 प्रतिभागी ओपन कैटेगरी से शामिल हैं।
चयनित प्रतिभागी अब 8 जून से 12 जून 2026 तक शिमला के रानी झांसी पार्क में अपने स्टॉल स्थापित करेंगे। इस दौरान वे अपने व्यंजनों का प्रदर्शन और विक्रय करेंगे तथा अंतिम चरण की प्रतियोगिता में भाग लेंगे। इसी चरण के आधार पर प्रतियोगिता के अंतिम विजेता का चयन किया जाएगा।
शिमला पहाड़ी स्वाद महोत्सव का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता आयोजित करना नहीं है, बल्कि हिमाचली व्यंजनों को व्यापक मंच प्रदान करना भी है। इससे स्थानीय खाद्य उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश की पारंपरिक पाक संस्कृति को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की संभावना बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल के पारंपरिक व्यंजन स्वास्थ्यवर्धक, पौष्टिक और स्थानीय कृषि उत्पादों पर आधारित होते हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से स्थानीय किसानों, महिला समूहों और खाद्य उद्यमियों को भी आर्थिक लाभ प्राप्त हो सकता है।
शिमला ग्रीष्मोत्सव के अंतर्गत आयोजित यह पाक कला प्रतियोगिता न केवल स्वाद और संस्कृति का उत्सव बनी, बल्कि हिमाचल की समृद्ध खाद्य विरासत को संरक्षित और प्रोत्साहित करने का एक प्रभावी माध्यम भी साबित हुई।