स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) हिमाचल प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर उठे विवादों के बीच राज्यव्यापी सामूहिक हस्ताक्षर अभियान शुरू करने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि यह अभियान छात्रों की आवाज को मजबूत करने और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता एवं जवाबदेही की मांग को लेकर चलाया जा रहा है।
SFI के अनुसार यह अभियान संगठन की केंद्रीय समिति के राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत प्रदेशभर के शैक्षणिक संस्थानों में चलाया जा रहा है। अभियान के माध्यम से छात्र संगठन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली, परीक्षा प्रबंधन और कथित अनियमितताओं के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहा है।
जारी संयुक्त प्रेस बयान में SFI हिमाचल प्रदेश के नेताओं ने कहा कि देशभर में लाखों छात्र विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की तैयारी के लिए वर्षों तक मेहनत करते हैं। छात्रों और उनके परिवारों द्वारा समय, श्रम और आर्थिक संसाधनों का निवेश किया जाता है। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी किसी भी प्रकार की अनियमितता छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रभाव डालती है।
संगठन ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय परीक्षाओं के संचालन को लेकर छात्रों के बीच भरोसे का संकट पैदा हुआ है। SFI नेताओं का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए व्यापक सुधारों की आवश्यकता है।
हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत करते हुए संगठन ने कहा कि इसका उद्देश्य छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और आम नागरिकों को इस मुद्दे पर जागरूक करना और उनकी राय को एकत्रित करना है। अभियान के तहत प्रदेश के विभिन्न कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में हस्ताक्षर एकत्र किए जाएंगे।
SFI हिमाचल प्रदेश ने अभियान के माध्यम से कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली की समीक्षा, परीक्षा प्रक्रिया में सुधार तथा कथित अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच शामिल है।
संगठन का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है। यदि परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो उनकी निष्पक्ष और समयबद्ध जांच होनी चाहिए ताकि छात्रों का विश्वास बहाल किया जा सके।
SFI ने यह भी मांग की है कि परीक्षा से जुड़े विवादों और अनियमितताओं की जांच स्वतंत्र एवं प्रभावी तरीके से करवाई जाए। संगठन का मानना है कि किसी भी जांच का उद्देश्य केवल तथ्यों को सामने लाना ही नहीं बल्कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकना भी होना चाहिए।
संगठन ने प्रभावित छात्रों को राहत और न्याय प्रदान करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि परीक्षा रद्द होने, परिणामों में देरी या अन्य विवादों के कारण छात्रों को मानसिक और आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में छात्रों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
SFI नेताओं ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते केंद्रीकरण के कारण कई व्यावहारिक चुनौतियां सामने आई हैं। संगठन ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, विकेंद्रीकृत और छात्र हितैषी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
अभियान के तहत छात्र संगठन प्रदेशभर के विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों से जुड़ने का प्रयास करेगा। संगठन का दावा है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए व्यापक जनभागीदारी आवश्यक है।

SFI हिमाचल प्रदेश ने कहा कि हस्ताक्षर अभियान केवल एक विरोध कार्यक्रम नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लोकतांत्रिक तरीके से सामने रखने का प्रयास है। संगठन का मानना है कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
संगठन ने प्रदेश के विद्यार्थियों और नागरिकों से अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण और निष्पक्ष शिक्षा व्यवस्था देश के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।