सलासी में डिजिटल मार्केटिंग एवं GeM पोर्टल पर कार्यशाला आयोजित, उद्यमियों को डिजिटल व्यवसाय की दी जानकारी
हमीरपुर। स्थानीय उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उत्पादकों को डिजिटल तकनीकों से जोड़ने तथा उनके व्यवसाय को नई दिशा देने के उद्देश्य से उद्योग विभाग द्वारा शनिवार को सलासी स्थित जिला पंचायत संसाधन केंद्र में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय ‘डिजिटल मार्केटिंग एवं डिजिटल साक्षरता’ तथा ‘गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल’ रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता उद्योग विभाग के विस्तार निरीक्षक (ईआई) प्रवेश कुमार ने की। कार्यशाला में विभिन्न स्वयं सहायता समूहों, लघु उद्यमियों, ग्रामीण उद्यमों और अन्य हितधारकों ने भाग लेकर डिजिटल व्यवसाय और सरकारी खरीद प्रणाली से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
अपने संबोधन में प्रवेश कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल तकनीक व्यवसायिक सफलता का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। छोटे और मध्यम स्तर के उद्यमी यदि डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग करें तो वे अपने उत्पादों और सेवाओं को स्थानीय बाजार से आगे राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्थानीय उद्यमियों को डिजिटल माध्यमों के उपयोग के प्रति जागरूक करना और उन्हें सरकारी खरीद प्रणाली से जोड़ना है। इसके माध्यम से स्वरोजगार और ग्रामीण उद्यमिता को नई गति मिल सकती है। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे डिजिटल तकनीकों को अपनाकर अपने व्यवसाय को आधुनिक स्वरूप दें।
कार्यशाला के दौरान रैम्प (RAMP) परियोजना के वरिष्ठ प्रबंधक अश्वनी शर्मा, विनय कुमार, नवीन शर्मा तथा अन्य विशेषज्ञ अधिकारियों ने विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। विशेषज्ञों ने डिजिटल मार्केटिंग के महत्व और आधुनिक व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
प्रतिभागियों को बताया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हाट्सएप बिजनेस आज व्यवसाय के प्रचार-प्रसार के प्रभावी माध्यम बन चुके हैं। इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए कम लागत में अधिक ग्राहकों तक पहुंच बनाई जा सकती है। साथ ही ऑनलाइन ब्रांड निर्माण, ग्राहक जुड़ाव और उत्पादों की डिजिटल प्रस्तुति के बारे में भी जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल मार्केटिंग केवल बड़े उद्योगों के लिए ही नहीं बल्कि छोटे व्यापारियों, महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उत्पादकों के लिए भी समान रूप से लाभकारी है। सही रणनीति के साथ स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा सकता है।
कार्यशाला में ऑनलाइन ब्रांडिंग और ग्राहक पहुंच बढ़ाने पर भी विशेष चर्चा हुई। प्रतिभागियों को बताया गया कि डिजिटल माध्यमों के जरिए अपने उत्पादों की पहचान मजबूत की जा सकती है और ग्राहकों के साथ दीर्घकालिक संबंध स्थापित किए जा सकते हैं। इससे बिक्री और आय में वृद्धि की संभावना बढ़ जाती है।
कार्यक्रम का दूसरा प्रमुख विषय गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल रहा। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को GeM पोर्टल पर पंजीकरण प्रक्रिया, उत्पाद सूचीकरण और सरकारी विभागों को वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति से संबंधित विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि GeM भारत सरकार का एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जहां विभिन्न सरकारी विभाग अपनी आवश्यकताओं के अनुसार उत्पाद और सेवाएं खरीदते हैं। इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण करके स्थानीय उद्यमी और स्वयं सहायता समूह सीधे सरकारी खरीदारों तक पहुंच बना सकते हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि GeM पोर्टल छोटे व्यवसायों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलता है। इसके माध्यम से पारदर्शी खरीद प्रक्रिया, समयबद्ध भुगतान और देशभर के सरकारी संस्थानों तक पहुंच संभव हो पाती है। इससे स्थानीय उत्पादकों और उद्यमियों को अपने व्यवसाय का विस्तार करने में सहायता मिलती है।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने डिजिटल मार्केटिंग, ऑनलाइन व्यापार और GeM पोर्टल से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने उनके सभी प्रश्नों का विस्तारपूर्वक समाधान किया और व्यावहारिक सुझाव भी दिए।
प्रतिभागियों ने कार्यशाला को उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम उन्हें बदलते डिजिटल परिवेश को समझने और नए अवसरों का लाभ उठाने में मदद करते हैं। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार की प्रशिक्षण कार्यशालाओं के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर जिला भाषा अधिकारी संतोष कुमार पटियाल तथा बीडीओ कार्यालय हमीरपुर की लेडी विलेज डेवलपमेंट कोऑर्डिनेटर वंदना कुमारी भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने भी प्रतिभागियों को डिजिटल माध्यमों और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।