सिरमौर जिले के पांवटा साहिब क्षेत्र में दुर्लभ एवं संरक्षित वन्यजीवों के शिकार से जुड़े मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। इस मामले में आरोपियों को बचाने के प्रयासों को लेकर समाजसेवी एवं पर्यावरणविद Nathuram Chauhan ने खुली चेतावनी जारी की है।
पांवटा साहिब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए Nathuram Chauhan ने कहा कि कुछ लोग इस गंभीर मामले की जांच को प्रभावित करने और आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी ने जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की कोशिश की, तो मामले की और भी परतें उजागर की जाएंगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि घुतनपुर गांव में प्रथम श्रेणी संरक्षित छह जंगली जानवरों के अवशेष मिलने के बावजूद कुछ तथाकथित नेता आरोपियों को बचाने में लगे हुए हैं। Nathuram Chauhan ने कहा कि यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण और जैव विविधता के लिए भी गंभीर खतरा है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में कुछ लोगों द्वारा अपनी राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल कर पुलिस प्रशासन और संबंधित विभागों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, जिन लोगों के खिलाफ सबूत सामने आए हैं, उन्हें बचाने के प्रयास हो रहे हैं, जो पूरी तरह गलत और निंदनीय है।
Nathuram Chauhan ने कहा कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर इस शिकार रैकेट का खुलासा किया है, उन्हें प्रोत्साहित करने के बजाय उनका मनोबल गिराने का प्रयास किया जा रहा है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और इससे कानून व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।
उन्होंने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि छोटे मामलों में जहां तुरंत कार्रवाई होती है, वहीं इस गंभीर मामले में अपेक्षित सख्ती नजर नहीं आ रही है। उन्होंने इसे दोहरे मानदंड का उदाहरण बताया।
Nathuram Chauhan ने स्पष्ट किया कि “जस्टिस फॉर देवात्मा हिमालय देवभूमि” जैसे मंच इस तरह के मामलों को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि बेजुबान वन्यजीवों की रक्षा के लिए जरूरत पड़ी तो सड़क से लेकर सरकार और यहां तक कि उच्चतम न्यायालय तक लड़ाई लड़ी जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में केवल सतही जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि गहराई से जांच की जानी चाहिए, ताकि इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके। उनके अनुसार, पांवटा साहिब क्षेत्र में शिकार से जुड़े कई और मामले सामने आ सकते हैं, जिनकी जांच होना जरूरी है।
Nathuram Chauhan ने यह भी चेतावनी दी कि इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल कानून का नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संरक्षित वन्यजीवों का शिकार न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि पारिस्थितिकी संतुलन को भी प्रभावित करता है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक होती है।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि पांवटा साहिब का यह मामला अब केवल एक स्थानीय घटना नहीं रहा, बल्कि यह कानून, पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक पारदर्शिता का महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है। अब यह देखना अहम होगा कि जांच एजेंसियां इस मामले में कितनी निष्पक्षता और तत्परता से कार्रवाई करती हैं।