हिमाचल प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना जरूरतमंद और बेसहारा बच्चों के जीवन में नई उम्मीद की किरण बनकर उभर रही है। जिला बिलासपुर के गांव ओयल निवासी शुभम की कहानी इस योजना की सफलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण है। माता-पिता का साया बचपन में ही खो देने वाले शुभम ने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन आज वह न केवल आत्मनिर्भर हैं बल्कि अपने दम पर सम्मानजनक जीवन भी जी रहे हैं।
बचपन में खो दिया माता-पिता का साया
वर्ष 2001 में जन्मे शुभम के जीवन में मुश्किलें बहुत जल्दी शुरू हो गई थीं। जन्म के कुछ समय बाद ही उनके माता-पिता का निधन हो गया। ऐसे में उनका पालन-पोषण उनके दादा-दादी ने किया। दादा-दादी ने सीमित संसाधनों के बावजूद शुभम को बेहतर जीवन देने का हर संभव प्रयास किया और उन्हें शिक्षा के लिए प्रेरित किया।
हालांकि समय ने एक और कठिन परीक्षा ली और शुभम के दादा का भी निधन हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती चली गई। घर में आय का कोई स्थायी साधन नहीं था और दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी मुश्किल होने लगा। इन चुनौतियों के बावजूद शुभम ने हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई जारी रखी।
संघर्षों के बीच पूरी की पढ़ाई
आर्थिक तंगी के बावजूद शुभम ने बारहवीं कक्षा तक की शिक्षा पूरी की। आगे की पढ़ाई और जीवन-यापन के लिए उन्होंने हेयर ड्रेसिंग का कार्य सीखना शुरू किया। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपना काम शुरू करने के लिए आवश्यक संसाधनों की थी। हुनर तो था, लेकिन आर्थिक सहायता के अभाव में स्वरोजगार स्थापित करना आसान नहीं था।
इसी दौरान मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना उनके जीवन में उम्मीद की नई रोशनी लेकर आई।
योजना ने दिया आर्थिक और मानसिक संबल
मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत शुभम को प्रतिमाह 4 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलने लगी। यह राशि उनके दैनिक जीवन और आवश्यक खर्चों में महत्वपूर्ण सहयोग साबित हुई। लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह रही कि इस योजना ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि वे अकेले नहीं हैं और सरकार उनके साथ खड़ी है।
इसके अलावा योजना के तहत स्वरोजगार स्थापित करने के लिए शुभम को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई। इसी सहायता के बल पर उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू किया और बिलासपुर शहर में “शुभ आर्टिस्टिक” नाम से सैलून स्थापित किया।
आज आत्मनिर्भर हैं शुभम
आज शुभम अपने सैलून का सफलतापूर्वक संचालन कर रहे हैं। अपने हुनर और मेहनत के दम पर उन्होंने न केवल खुद के लिए रोजगार का साधन तैयार किया है बल्कि समाज में सम्मानजनक पहचान भी बनाई है।
शुभम कहते हैं कि यदि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना का सहयोग नहीं मिलता तो शायद उनका जीवन संघर्षों में ही उलझा रहता। उनका मानना है कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं देती, बल्कि बेसहारा बच्चों और युवाओं को आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की प्रेरणा भी प्रदान करती है।
उन्होंने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना हजारों जरूरतमंद बच्चों के जीवन को नई दिशा देने का कार्य कर रही है।
जिला में अनेक लाभार्थी हो रहे लाभान्वित
जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग बिलासपुर नरेंद्र कुमार के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान जिला बिलासपुर में मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत 154 पात्र लाभार्थियों को विभिन्न घटकों के अंतर्गत लाभ प्रदान किया गया है।
उन्होंने बताया कि योजना के तहत सामाजिक सुरक्षा, विवाह अनुदान, गृह निर्माण, उच्च शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा और स्टार्टअप सहायता जैसे विभिन्न मदों में लगभग 1.69 करोड़ रुपये की राशि व्यय की गई है।
इसके अतिरिक्त कई बच्चों को एक्सपोजर विजिट का अवसर भी उपलब्ध करवाया गया है ताकि वे नई संभावनाओं और अवसरों से परिचित हो सकें।
प्रशासन का विशेष फोकस
उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना प्रदेश सरकार की एक महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी पहल है। इसका उद्देश्य बेसहारा, अनाथ और जरूरतमंद बच्चों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी है।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत है कि पात्र लाभार्थियों तक योजना का लाभ समयबद्ध और प्रभावी ढंग से पहुंचे। प्रशासन की प्राथमिकता है कि अधिक से अधिक पात्र बच्चों और युवाओं को इस योजना से जोड़ा जाए ताकि वे अपने जीवन में नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकें।
शुभम की सफलता की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही समय पर मिली सहायता और अवसर किसी भी व्यक्ति के जीवन को नई दिशा दे सकते हैं। मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना ऐसे ही अनेक युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने का कार्य कर रही है।