शिमला में ‘मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0’ अभियान शुरू

rakesh nandan

29/05/2026

शिमला में ‘मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0’ अभियान शुरू, लंबित मामलों के त्वरित निपटारे पर जोर

शिमला, 29 मई। न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, सरल और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से जिला शिमला में ‘मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0 अभियान’ शुरू किया गया है। यह अभियान राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) तथा मध्यस्थता और सुलह परियोजना समिति के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। अभियान का मुख्य उद्देश्य लंबे समय से लंबित मामलों का आपसी सहमति और मध्यस्थता के माध्यम से शीघ्र एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है।

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी एवं सचिव, District Legal Services Authority Shimla के सचिव Umesh Verma ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला शिमला के अधीनस्थ न्यायालयों में यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनका समाधान पक्षकारों की आपसी सहमति से संभव है।

उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के विवादों और लंबित मामलों का निस्तारण किया जाएगा। इनमें विवाह एवं पारिवारिक विवाद, मोटर वाहन चालान मामले, घरेलू हिंसा से संबंधित प्रकरण, चेक बाउंस के मामले, वाणिज्यिक एवं सेवा संबंधी विवाद, समझौता योग्य आपराधिक मामले, उपभोक्ता शिकायतें, ऋण वसूली के मामले, संपत्ति विभाजन और बेदखली से जुड़े मुकदमे तथा भूमि अधिग्रहण से संबंधित प्रकरण शामिल हैं।

उमेश वर्मा ने कहा कि न्यायालयों में बड़ी संख्या में ऐसे मामले लंबित रहते हैं, जिनका समाधान आपसी संवाद और सहमति से किया जा सकता है। ऐसे मामलों में मध्यस्थता एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभरकर सामने आई है। इससे न केवल पक्षकारों का समय बचता है, बल्कि अनावश्यक कानूनी खर्च और लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से भी राहत मिलती है।

उन्होंने बताया कि मध्यस्थता एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें प्रशिक्षित और निष्पक्ष मध्यस्थ की सहायता से विवाद में शामिल दोनों पक्ष आपसी बातचीत के माध्यम से समाधान खोजते हैं। इस प्रक्रिया में किसी भी पक्ष पर कोई निर्णय थोपा नहीं जाता, बल्कि दोनों पक्षों की सहमति से समाधान तैयार किया जाता है। यही कारण है कि मध्यस्थता के माध्यम से हुए समझौते अधिक टिकाऊ और संतोषजनक माने जाते हैं।

सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने कहा कि मध्यस्थता की सबसे बड़ी विशेषता इसकी गोपनीयता है। न्यायालयी कार्यवाही की तुलना में यह प्रक्रिया अधिक लचीली और अनौपचारिक होती है, जिससे पक्षकार खुलकर अपनी बात रख सकते हैं। इसके अलावा यह कम खर्चीली होने के साथ-साथ विवादों के समाधान का एक त्वरित माध्यम भी है।

उन्होंने कहा कि कई बार पारिवारिक और सामाजिक संबंधों से जुड़े विवाद लंबे समय तक न्यायालयों में लंबित रहने के कारण तनाव बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में मध्यस्थता रिश्तों को बनाए रखते हुए समाधान का अवसर प्रदान करती है। विशेष रूप से वैवाहिक विवाद, पारिवारिक मतभेद और संपत्ति संबंधी मामलों में यह प्रक्रिया काफी प्रभावी साबित हुई है।

उमेश वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर भी न्यायपालिका और विधिक सेवा संस्थाएं मध्यस्थता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। इसका उद्देश्य न्यायालयों पर बढ़ते मामलों के बोझ को कम करना और नागरिकों को सुलभ एवं शीघ्र न्याय उपलब्ध करवाना है। ‘मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0’ अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

उन्होंने जिला शिमला के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि जिन लोगों के मामले न्यायालयों में लंबित हैं या जो आपसी विवादों का शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं, वे इस अभियान का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता न केवल समय और धन की बचत करती है, बल्कि सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास को भी मजबूत बनाती है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभियान के दौरान योग्य मामलों की पहचान कर उन्हें मध्यस्थता के लिए भेजा जाएगा, जहां प्रशिक्षित मध्यस्थ दोनों पक्षों के साथ चर्चा कर समाधान का प्रयास करेंगे। यदि दोनों पक्ष सहमत होते हैं तो समझौते के आधार पर मामला समाप्त किया जा सकता है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का मानना है कि इस अभियान से बड़ी संख्या में लंबित मामलों का निस्तारण संभव होगा और लोगों को न्याय प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिक सरल और प्रभावी बनेगी। प्रशासन और न्यायिक संस्थाओं ने नागरिकों से इस पहल में सक्रिय भागीदारी की अपील की है ताकि विवादों का समाधान संवाद और सहमति के माध्यम से किया जा सके।