हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में भारत सरकार की संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के तहत पारंपरिक बिजली मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने का कार्य तेजी से जारी है। इस संबंध में विद्युत उपमंडल-1 मंडी के सहायक अभियंता नरेश ठाकुर ने विस्तृत जानकारी साझा करते हुए उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील की है।
उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत प्रदेशभर में पुराने मीटरों को चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट मीटर से प्रतिस्थापित किया जा रहा है। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में उपभोक्ताओं पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं डाला जा रहा है। यह कार्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद अधिकृत एजेंसी अप्रावा हमीरपुर स्मार्ट मीटर प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से किया जा रहा है।
हालांकि, विभाग के संज्ञान में यह भी आया है कि कुछ स्थानों पर उपभोक्ता अधिकृत कर्मचारियों या एजेंसी को अपने परिसर में प्रवेश करने और पुराने मीटर बदलने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। इससे विद्युत वितरण लाइसेंसी हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड के कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही है। विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि इस तरह का व्यवहार विधिसम्मत कार्यों में अवरोध पैदा करता है।
सहायक अभियंता ने बताया कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा जारी संशोधित विनियम 2026 के अनुसार, जिन क्षेत्रों में संचार नेटवर्क उपलब्ध है, वहां निर्धारित समयावधि में स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य किया गया है। यह कदम बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और कुशल बनाने की दिशा में उठाया गया है।
उन्होंने विद्युत अधिनियम, 2003 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि धारा 163 (1) के तहत लाइसेंसी या उसके अधिकृत प्रतिनिधि को उचित सूचना देकर किसी भी परिसर में प्रवेश करने का अधिकार है, ताकि मीटर की जांच, मरम्मत या प्रतिस्थापन किया जा सके। इसके अलावा, धारा 163 (3) के अनुसार यदि कोई उपभोक्ता अधिकृत अधिकारी को कार्य करने से रोकता है, तो लिखित सूचना देने के 24 घंटे बाद उसकी बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से काटी जा सकती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि स्मार्ट मीटर लगाने से उपभोक्ताओं के लिए शुल्क दर या सरकारी अनुदान में किसी प्रकार का बदलाव नहीं होगा। मौजूदा मीटर सामान्यतः लाइसेंसी की संपत्ति होते हैं और उनका प्रतिस्थापन एक नियमित तकनीकी प्रक्रिया है। स्मार्ट मीटर प्रणाली लागू होने से उपभोक्ताओं को बिजली खपत की सटीक जानकारी मिलेगी और बिलिंग प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली विभाग को रियल-टाइम डेटा प्राप्त होगा, जिससे लाइन लॉस कम करने और बिजली वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, उपभोक्ताओं को भी अपनी खपत पर नियंत्रण रखने का अवसर मिलेगा, जिससे बिजली बिल को नियंत्रित करना आसान होगा।
सहायक अभियंता नरेश ठाकुर ने सभी उपभोक्ताओं से आग्रह किया है कि वे अधिकृत अधिकारियों और एजेंसी के साथ सहयोग करें और अपने परिसर में स्मार्ट मीटर लगाने की अनुमति दें। उन्होंने कहा कि यह कार्य जनहित में किया जा रहा है और इससे सभी को लाभ होगा।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई उपभोक्ता सहयोग नहीं करता है, तो विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें बिजली आपूर्ति का अस्थायी विच्छेदन भी शामिल है।
अंत में उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर प्रणाली भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे सफल बनाने के लिए उपभोक्ताओं का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। यदि सभी मिलकर इस योजना को अपनाते हैं, तो यह बिजली वितरण प्रणाली को अधिक विश्वसनीय और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।