मंडी में पेंशन, जीपीएफ एवं लेखा कार्यशाला आयोजित, पारदर्शिता और गुणवत्ता पर जोर
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के दिशा-निर्देशों के अनुसार जिला स्तर पर पेंशन, सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) एवं लेखा कार्यशाला का आयोजन आज उपायुक्त कार्यालय परिसर मंडी में किया गया। यह कार्यशाला प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) कार्यालय की ओर से आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य पेंशन और लेखा संबंधी कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करना था।
कार्यशाला का शुभारंभ अतिरिक्त उपायुक्त मंडी गुरसिमर सिंह ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े मामलों का समय पर और पारदर्शी निपटारा प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने इस प्रकार की कार्यशालाओं को प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और कर्मचारियों को नवीन प्रक्रियाओं से अवगत कराने के लिए महत्वपूर्ण बताया।
कार्यशाला में प्रधान महालेखाकार सुशील ठाकुर के निर्देशों के तहत पेंशन एवं सामान्य भविष्य निधि मामलों में हकदारी कार्यों को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने पर विशेष चर्चा की गई। इसके साथ ही हितधारकों के मामलों का समय पर निपटारा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को आवश्यक जानकारी और दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।
कार्यक्रम के दौरान आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (डीडीओ), कोष कार्यालयों, लोक निर्माण विभाग मंडलों, जल शक्ति मंडलों तथा विभिन्न विभागों में कार्यरत मंडलीय और वरिष्ठ मंडलीय लेखा अधिकारियों के साथ लेखांकन और पेंशन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की गईं।
अधिकारियों को बताया गया कि सरकारी लेखांकन प्रणाली को मजबूत करने और त्रुटिरहित कार्य सुनिश्चित करने के लिए विभागीय समन्वय और समयबद्ध कार्रवाई बेहद आवश्यक है। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर लेखांकन व्यवस्था को सुदृढ़ करना और प्रक्रियाओं में एकरूपता लाना भी रहा।
इस अवसर पर उपनिदेशक (कोष एवं लेखा) राजेंद्र डोगरा और जिला कोषाधिकारी मंडी परीक्षित मिन्हास विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में इस प्रकार की कार्यशालाओं और पेंशन अदालतों के नियमित आयोजन पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि समय-समय पर आयोजित होने वाली कार्यशालाएं अधिकारियों और कर्मचारियों को नवीन नियमों, तकनीकी प्रक्रियाओं और लेखांकन प्रणाली की जानकारी उपलब्ध करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे पेंशन और जीपीएफ मामलों में होने वाली देरी और त्रुटियों को कम करने में सहायता मिलती है।
कार्यशाला में प्रधान महालेखाकार कार्यालय शिमला से वरिष्ठ लेखा अधिकारी मोहन लाल ने अध्यक्षता की। उन्होंने पेंशन और निधि से संबंधित विषयों पर विस्तृत प्रस्तुति (पीपीटी) दी। प्रस्तुति के दौरान अधिकारियों को पेंशन मामलों के निपटारे, दस्तावेज सत्यापन, सामान्य त्रुटियों और समयबद्ध कार्रवाई के बारे में जानकारी दी गई।
इसके अतिरिक्त वरिष्ठ लेखा अधिकारी मदन लाल भारद्वाज ने लेखों की गुणवत्ता और महत्व पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने अधिकारियों को सरकारी लेखांकन प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने, अभिलेखों का सही रखरखाव करने तथा वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यशाला में जिला स्तर के सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों, मंडलीय लेखा अधिकारियों, कोष अधिकारियों और उनके प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक विषयों पर विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी करवाया।
विशेषज्ञों का मानना है कि पेंशन और लेखा संबंधी मामलों में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए इस प्रकार की कार्यशालाएं बेहद उपयोगी होती हैं। इससे न केवल अधिकारियों की कार्यकुशलता बढ़ती है बल्कि कर्मचारियों और पेंशनरों को भी समय पर लाभ मिल पाता है।
कार्यशाला के दौरान डिजिटल प्रणाली और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों को ऑनलाइन प्रक्रियाओं, रिकॉर्ड प्रबंधन और समयबद्ध निपटारे के लिए तकनीकी संसाधनों के बेहतर उपयोग की जानकारी दी गई।
अतिरिक्त उपायुक्त गुरसिमर सिंह ने कहा कि प्रशासन का प्रयास है कि पेंशनरों और कर्मचारियों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए विभागीय स्तर पर लगातार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने इस प्रकार की कार्यशालाओं को नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर सहमति जताई ताकि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।