मंडी की 24 रेड जोन पंचायतों में नशे की रोकथाम के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की ड्यूटी तय
जिला मंडी में नशे के बढ़ते खतरे को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। जिला स्तरीय नार्को समन्वय केंद्र समिति (एनकॉर्ड) की 4 मई को आयोजित मासिक बैठक में लिए गए निर्णयों के बाद उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने जिला की चिन्हित 24 रेड जोन पंचायतों में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की ड्यूटी निर्धारित करने संबंधी आदेश जारी किए हैं।
प्रशासन द्वारा जारी आदेशों के अनुसार जून माह के दौरान संबंधित अधिकारी पंचायत स्तर पर जाकर नशे के खिलाफ चल रही गतिविधियों, जनजागरूकता अभियानों तथा निगरानी व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। प्रशासन का उद्देश्य केवल नशे की आपूर्ति रोकना ही नहीं बल्कि इसकी मांग को समाप्त करने के लिए भी प्रभावी कदम उठाना है।
उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया कि 4 मई को आयोजित एनकॉर्ड बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि जिला की 24 रेड जोन पंचायतों के लिए एक ठोस और समन्वित रणनीति तैयार की जाए। इसी दिशा में अब प्रशासन और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को पंचायतवार जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं ताकि जमीनी स्तर पर प्रभावी निगरानी और कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
जारी आदेशों के अनुसार उपायुक्त मंडी स्वयं भड़याल, नागचला, कुम्मी, गोड़ा-गागल, टकोली, गुमाणु, मराथू, सदयाणा, रंधाड़ा और नगवाईं पंचायतों का दौरा करेंगे। इन दौरों के दौरान पंचायत स्तर पर चल रही गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी और स्थानीय लोगों के साथ संवाद स्थापित किया जाएगा।
इसी प्रकार पुलिस अधीक्षक मंडी को धेलू, पधयूं, सुधार, धमचयान, लटराण, तरस्वाण, डलाह, चौंतड़ा, सलापड़ और कांगू पंचायतों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पुलिस विभाग इन क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखने और नशा तस्करी से जुड़े मामलों पर कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
अतिरिक्त उपायुक्त मंडी को बलद्वाड़ा नगर पंचायत और खुडला पंचायत का दौरा करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी मंडी को सुलपुर जबोठ पंचायत तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मंडी को ब्रयोगी पंचायत का निरीक्षण करने की जिम्मेदारी दी गई है।
उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में इस महीने आयोजित उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों की बैठक में भी नशा रोकथाम को लेकर विशेष निर्देश जारी किए गए थे। मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को रेड जोन पंचायतों का नियमित दौरा करने और जमीनी स्तर पर निगरानी मजबूत करने के निर्देश दिए थे।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों और एनकॉर्ड बैठक में लिए गए निर्णयों की अनुपालना करते हुए यह आदेश जारी किए गए हैं। जिला प्रशासन नशे के खिलाफ अभियान को केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि सामाजिक जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी को भी मजबूत करना चाहता है।
उपायुक्त ने बताया कि पंचायतों, नशा निवारण समितियों, स्थानीय समुदायों और विभिन्न विभागों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पंचायत दौरों के दौरान स्थानीय युवाओं, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के साथ बैठकें आयोजित कर नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए।
उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। इसके लिए पंचायत स्तर पर खेल गतिविधियों, जागरूकता कार्यक्रमों और सामाजिक अभियानों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को संदिग्ध गतिविधियों पर सतत निगरानी रखने के निर्देश भी दिए हैं। यदि किसी क्षेत्र में नशा तस्करी या अवैध गतिविधियों की सूचना मिलती है तो तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं जीती जा सकती। इसके लिए समाज, परिवार, पंचायतों और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी भी बेहद जरूरी है। सामुदायिक जागरूकता और युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना नशे की समस्या को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं बल्कि समाज में नशे के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सुरक्षित सामाजिक वातावरण तैयार करना भी है। उन्होंने लोगों से भी प्रशासन का सहयोग करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या प्रशासन को देने की अपील की।