हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (चरण-II) के अंतर्गत खंड परियोजना प्रबंधन इकाई मंडी द्वारा निर्मित जरल खड्ड–समराहन प्रवाह सिंचाई योजना का सफलतापूर्वक हस्तांतरण कर दिया गया है। इस योजना के शुरू होने से क्षेत्र के किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
इस सिंचाई योजना के माध्यम से लगभग 8.5 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा से जोड़ा गया है, जिससे कुल 57 किसान सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। यह योजना किसानों को समय पर पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होगी, जिससे उनकी फसल उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी।
इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला परियोजना प्रबंधक डॉ हेमराज वर्मा ने बताया कि यह योजना क्षेत्र के कृषि विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत 620 मीटर लंबी कूहल का निर्माण किया गया है, जिससे खड्ड का पानी सीधे खेतों तक पहुंचाया जा सकेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि पानी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत हेड वियर संरचना का निर्माण किया गया है। इस संरचना के माध्यम से पानी का प्रवाह नियंत्रित और सुचारू रूप से बनाए रखा जाएगा, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होगा।
डॉ. वर्मा ने किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ नकदी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों और बाजार आधारित कृषि को अपनाते हैं, तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। उन्होंने सरकार की विभिन्न कृषक हितैषी योजनाओं का लाभ उठाने की भी अपील की।
उन्होंने फसल विविधीकरण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह न केवल खेती को लाभकारी बनाता है, बल्कि किसानों को जोखिम से भी बचाता है। अलग-अलग फसलों की खेती से आय के स्रोत बढ़ते हैं और कृषि क्षेत्र में स्थिरता आती है।
इसके अलावा, डॉ. वर्मा ने कृषक विकास संघ की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि किसानों को एकजुट होकर नियमित बैठकें आयोजित करनी चाहिए और एक सामूहिक फंड बनाना चाहिए। इससे प्राकृतिक आपदाओं या अन्य कारणों से कूहल को होने वाले नुकसान की समय पर मरम्मत की जा सकेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सिंचाई योजना के रखरखाव की जिम्मेदारी किसानों के संगठन, यानी कृषक विकास संघ की होगी। यदि सभी किसान मिलकर इस योजना का संचालन करेंगे, तो यह लंबे समय तक सफलतापूर्वक चल सकेगी और क्षेत्र की कृषि को नई दिशा देगी।
इस अवसर पर विषयवाद विशेषज्ञ डॉ खूब राम और खंड परियोजना प्रबंधक डॉ राजेश कुमार सहित अन्य अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
किसानों ने इस योजना को लेकर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उन्हें सिंचाई की समस्या से राहत मिलेगी और वे अपनी फसलों की बेहतर देखभाल कर सकेंगे। उन्होंने सरकार और संबंधित विभाग का आभार भी व्यक्त किया।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि जरल खड्ड–समराहन प्रवाह सिंचाई योजना मंडी जिले के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, जो उनकी आय बढ़ाने और कृषि को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।