मंडी में मत्स्यिकी विभाग ने अवैध मत्स्य शिकार और अवैध मछली बिक्री के खिलाफ सख्त अभियान शुरू कर दिया है। विभागीय टीमों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में लगातार गश्त और निरीक्षण किए जा रहे हैं। विभाग का उद्देश्य नदियों और जल स्रोतों में मत्स्य संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा अवैध कारोबार पर रोक लगाना है।
सहायक निदेशक मत्स्य मंडल मंडी नीतू सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि कुछ मछली विक्रेता बिना बिल और आवश्यक दस्तावेजों के अवैध रूप से मछली लाकर बेच रहे हैं। इसी क्रम में विभागीय टीम ने हाल ही में पंडोह बाजार में गश्त कर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई। उन्होंने कहा कि विभाग अवैध गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
उन्होंने बताया that चालू वित्तीय वर्ष के अप्रैल माह में ही अवैध मत्स्य शिकार और अवैध मत्स्य विक्रय के कुल 11 मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में मौके पर कुल 5 हजार 900 रुपये जुर्माना भी वसूला गया है। विभाग के अनुसार ये मामले सुकेती खड्ड पुल घराट, खलियार, मंडी, सौली खड्ड, ब्यास नदी और पंडोह क्षेत्र से संबंधित हैं।
मत्स्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध रूप से मछली पकड़ने और बेचने वालों के खिलाफ मत्स्य अधिनियम 1976 तथा मत्स्य नियमावली 2020 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि इन प्रावधानों के अंतर्गत दोषियों पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान है। अधिकारियों ने नदीप मछुआरों और मछली विक्रेताओं से नियमों का पालन करने की अपील की है।
नीतू सिंह ने कहा कि बेरोजगार युवा और इच्छुक व्यक्ति मत्स्य आखेट को वैध व्यवसाय के रूप में अपना सकते हैं। विभाग द्वारा सामान्य जल में मछली पकड़ने के लिए 200 रुपये का वार्षिक लाइसेंस उपलब्ध करवाया जाता है। वहीं ट्राउट मछली पकड़ने के लिए 300 रुपये का दैनिक लाइसेंस लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लाइसेंस प्राप्त कर लोग कानूनी तरीके से इस व्यवसाय से जुड़ सकते हैं।
मत्स्य विभाग का मानना है कि अवैध शिकार और अनियमित बिक्री से प्राकृतिक मत्स्य संसाधनों को नुकसान पहुंचता है। इसलिए विभाग द्वारा समय-समय पर निरीक्षण और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से सहयोग करने और किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना विभाग को देने की अपील की है।