हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर में स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। नगर निगम मंडी द्वारा अपने क्षेत्र के सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और उनके प्रतिनिधियों के साथ एक जागरूकता एवं क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला नगर निगम के सभागार में आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता आयुक्त रोहित राठौर ने की।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों के माध्यम से स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम के दौरान ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के बारे में जानकारी दी गई और कचरे के पृथक्करण (Segregation) के महत्व को सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाया गया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए आयुक्त रोहित राठौर ने कहा कि कचरे का सही तरीके से पृथक्करण स्वच्छता की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि यदि घर, विद्यालय और सार्वजनिक स्थानों पर गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र किया जाए, तो कचरा प्रबंधन प्रणाली अधिक प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल बन सकती है।
उन्होंने आगे बताया कि “स्वच्छ शहर, समृद्ध शहर” अभियान के तहत विक्रमादित्य सिंह द्वारा हिमाचल दिवस के अवसर पर 15 अप्रैल को सेरी मंच से “क्लीन मंडी, ग्रीन मंडी 2026” अभियान की शुरुआत की गई थी। इस अभियान का उद्देश्य शहर को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।
इस पहल के अंतर्गत नगर निगम मंडी द्वारा आधुनिक सूचना एवं संचार माध्यमों (IEC) का उपयोग करते हुए सोशल मीडिया के जरिए भी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। 15 अप्रैल को मंत्री द्वारा एक जागरूकता गीत भी लॉन्च किया गया, जिसके आधार पर “क्लीन मंडी, ग्रीन मंडी 2026” सोशल मीडिया अभियान शुरू किया गया।
अभियान के तहत सभी विद्यालयों को अपने विद्यार्थियों के माध्यम से स्वच्छता और कचरा प्रबंधन से संबंधित विषयों पर लघु वीडियो (रील्स) तैयार कर सोशल मीडिया पर साझा करने के लिए प्रेरित किया गया है। यह अभियान 15 मई 2026 तक जारी रहेगा। इससे विद्यार्थियों में रचनात्मकता के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी।
आयुक्त ने विशेष रूप से विद्यार्थियों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि बच्चे समाज में बदलाव लाने के सबसे प्रभावी माध्यम होते हैं। जब बच्चे स्वच्छता के संदेश को अपनाते हैं और उसे अपने परिवार तथा समाज तक पहुंचाते हैं, तो उसका प्रभाव तेजी से फैलता है। इस तरह एक सकारात्मक श्रृंखलाबद्ध प्रभाव उत्पन्न होता है, जिससे व्यापक स्तर पर जागरूकता बढ़ती है।
विद्यालयों को भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया है। उन्हें अपने स्तर पर नियमित रूप से स्वच्छता संबंधी गतिविधियां और कार्यशालाएं आयोजित करने के लिए कहा गया है, ताकि विद्यार्थियों को लगातार इस विषय के प्रति जागरूक रखा जा सके।
कार्यशाला में यह भी बताया गया कि यदि समाज के सभी वर्ग मिलकर इस अभियान में भाग लें, तो “क्लीन मंडी, ग्रीन मंडी 2026” जैसे अभियान को सफल बनाया जा सकता है। यह केवल एक सरकारी पहल नहीं है, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है, जिसमें हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है।
अंत में, नगर निगम ने सभी विद्यालयों और नागरिकों से अपील की कि वे स्वच्छता को अपनी दैनिक आदत का हिस्सा बनाएं और कचरे के सही प्रबंधन में योगदान दें। इस प्रकार के प्रयास न केवल शहर को स्वच्छ बनाएंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।