हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में गायनी ओपीडी को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित करने के फैसले को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने इस निर्णय का कड़ा विरोध जताया है और इसे महिलाओं के हितों के खिलाफ बताया है।
महिला समिति का कहना है कि सरकार ने जल्दबाजी में यह फैसला लिया है, जिससे हजारों महिलाओं को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उनका आरोप है कि गायनी ओपीडी को आईजीएमसी में स्थानांतरित करना न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी। समिति के अनुसार, गायनी और प्रसूति विभाग एक-दूसरे के पूरक हैं और इन्हें अलग करना चिकित्सा व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।
समिति ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार के सामने ऐसी कौन सी मजबूरी थी, जिसके कारण इस तरह का निर्णय जल्दबाजी में लिया गया। उनका कहना है कि इस फैसले के कारण मरीजों को आईजीएमसी और कमला नेहरू अस्पताल के बीच आना-जाना पड़ रहा है, जिससे विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
महिला समिति ने दावा किया कि इस निर्णय के पहले ही दिन कई समस्याएं सामने आ गईं। उन्होंने बताया कि आईजीएमसी में गायनी से जुड़े चार ऑपरेशन निर्धारित किए गए थे, लेकिन आवश्यक सुविधाओं के अभाव के कारण इन ऑपरेशनों को अंततः कमला नेहरू अस्पताल में ही करना पड़ा। इसे समिति ने सरकार की बड़ी विफलता करार दिया है।
समिति का कहना है कि सरकार बिना पर्याप्त तैयारी और संसाधनों के इस तरह के महत्वपूर्ण विभाग को स्थानांतरित कर रही है, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी मुख्यमंत्री को गलत जानकारी देकर इस निर्णय को लागू करवा रहे हैं।
महिला समिति ने सुझाव दिया कि सरकार को इस विषय में विशेषज्ञों और अनुभवी डॉक्टरों से सलाह लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गायनी और प्रसूति सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञों की राय के बिना इस तरह का निर्णय लेना उचित नहीं है।
इसके अलावा, समिति ने यह भी कहा कि किसी भी बड़े प्रशासनिक निर्णय को लागू करने से पहले उसके संभावित प्रभावों का गहन अध्ययन किया जाना चाहिए। जल्दबाजी में लिए गए फैसले अक्सर समस्याओं को बढ़ा देते हैं, जैसा कि इस मामले में देखने को मिल रहा है।
इस मुद्दे को लेकर विरोध भी तेज होता जा रहा है। महिला समिति और शिमला के विभिन्न जनसंगठनों ने 13 अप्रैल को इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया था। अब उन्होंने 30 अप्रैल को आईजीएमसी के बाहर धरना-प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है।
समिति का कहना है कि यदि सरकार ने इस निर्णय को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई केवल एक विभाग के स्थानांतरण की नहीं है, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य अधिकारों और सुविधाओं की रक्षा की है।
अंत में, महिला समिति ने सरकार से अपील की है कि वह इस निर्णय पर पुनर्विचार करे और मरीजों की सुविधा को प्राथमिकता दे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के नाम पर ऐसी नीतियां नहीं बनाई जानी चाहिए, जो जनता के लिए परेशानी का कारण बनें।