नगर निगम मंडी क्षेत्र के नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संबंधी परामर्श जारी किया गया है। नगर निगम आयुक्त Rohit Rathour ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में स्थित विभिन्न बावड़ियों (प्राकृतिक जल स्रोतों) के जल की गुणवत्ता की हाल ही में जांच करवाई गई, जिसमें कुछ स्रोतों का पानी निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरा। ऐसे में इन बावड़ियों का जल फिलहाल मानव उपभोग के लिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
आयुक्त रोहित राठौर ने बताया कि जल शक्ति विभाग मंडी द्वारा नगर निगम क्षेत्र में स्थित विभिन्न प्राकृतिक जल स्रोतों के नमूनों की माइक्रोबायोलॉजिकल जांच की गई थी। जांच रिपोर्ट में कुछ बावड़ियों के पानी में गुणवत्ता संबंधी कमियां पाई गईं, जिसके बाद नगर निगम प्रशासन ने एहतियात के तौर पर नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु के आगमन के साथ जल स्रोतों के दूषित होने की संभावना बढ़ जाती है। बरसात के दौरान मिट्टी, गाद, जैविक अपशिष्ट और अन्य बाहरी तत्व जल स्रोतों में मिल सकते हैं, जिससे पानी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। यही कारण है कि मानसून से पहले और उसके दौरान जल स्रोतों की नियमित जांच और निगरानी आवश्यक होती है।
नगर निगम आयुक्त ने स्पष्ट किया कि जिन बावड़ियों का पानी जांच में मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया है, उनका उपयोग आगामी आदेशों तक पेयजल या घरेलू कार्यों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे केवल सुरक्षित और स्वच्छ जल का ही उपयोग करें ताकि जलजनित बीमारियों से बचा जा सके।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार दूषित पानी के सेवन से डायरिया, टाइफाइड, हैजा, पेट संबंधी संक्रमण और अन्य जलजनित रोग फैलने का खतरा बढ़ जाता है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए दूषित पानी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
नगर निगम मंडी ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित बावड़ियों की सफाई और सुधारात्मक कार्य शुरू कर दिए हैं। आयुक्त ने बताया कि संबंधित जल स्रोतों की गहन सफाई की जा रही है। इसके तहत गाद निकालने, आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ बनाने और जल स्रोतों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जल स्रोतों की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार कार्य किया जा रहा है। नगर निगम का प्रयास है कि जल्द से जल्द इन बावड़ियों का पानी दोबारा उपयोग योग्य बनाया जा सके।
रोहित राठौर ने बताया कि नगर निगम द्वारा जल स्रोतों की नियमित निगरानी की जा रही है। समय-समय पर जल नमूनों की जांच भी करवाई जाएगी ताकि पानी की गुणवत्ता का सही आकलन किया जा सके। जब जांच रिपोर्ट संतोषजनक आएगी और जल गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई जाएगी, तभी इन स्रोतों के उपयोग संबंधी अगली सूचना जारी की जाएगी।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें। जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है और इसमें नागरिकों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
नगर निगम प्रशासन ने यह भी कहा कि प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण और स्वच्छता में स्थानीय समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यदि लोग जल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखें, कचरा न फेंकें और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाएं तो जल स्रोतों की गुणवत्ता को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
बरसात के मौसम में जल स्रोतों की सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। इसी उद्देश्य से नगर निगम मंडी जल गुणवत्ता की निगरानी के साथ-साथ जनजागरूकता गतिविधियों पर भी ध्यान दे रहा है।
आयुक्त ने कहा कि नागरिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए जब तक जल गुणवत्ता पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं की जाती, तब तक लोग इन बावड़ियों के पानी का उपयोग करने से बचें और स्वच्छ एवं प्रमाणित जल स्रोतों का ही उपयोग करें।