KNH शिफ्टिंग पर हाईकोर्ट रोक, भाजपा ने घेरा सरकार

rakesh nandan

13/05/2026

Himachal Pradesh High Court द्वारा शिमला के ऐतिहासिक Kamla Nehru Hospital को आईजीएमसी परिसर में शिफ्ट करने के प्रदेश सरकार के फैसले पर रोक लगाए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी ने इस फैसले को जनता की जीत बताते हुए कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

भाजपा मीडिया संयोजक Karan Nanda ने कहा कि हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और सरकार को लगाई गई फटकार यह स्पष्ट करती है कि कांग्रेस सरकार ने बिना जनभावनाओं और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की वास्तविक जरूरतों को समझे जल्दबाजी में निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि अदालत का यह रुख दर्शाता है कि सरकार ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर पर्याप्त तैयारी और विशेषज्ञ सलाह के बिना कदम उठाया।

कर्ण नंदा ने कहा कि भाजपा शुरू से ही इस फैसले का विरोध कर रही थी क्योंकि कमला नेहरू अस्पताल केवल एक भवन नहीं, बल्कि प्रदेश की लाखों महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एक महत्वपूर्ण संस्था है। उन्होंने कहा कि यह अस्पताल वर्षों से महिलाओं, गर्भवती माताओं और दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल को आईजीएमसी परिसर में शिफ्ट करने का निर्णय महिलाओं की स्वास्थ्य सुविधाओं को प्रभावित करने वाला था। भाजपा का मानना था कि इससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता था। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के लिए यह व्यवस्था कठिनाई बढ़ाने वाली साबित हो सकती थी।

भाजपा नेता ने कहा कि पार्टी ने इस मामले को लेकर लगातार सड़क से लेकर राजभवन तक संघर्ष किया। भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला और पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। इसके अलावा भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने कई स्थानों पर धरना-प्रदर्शन कर सरकार के इस फैसले का विरोध किया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार जनता की भावनाओं को समझने में पूरी तरह विफल रही है। सरकार को अस्पताल शिफ्टिंग जैसे संवेदनशील फैसले से पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञों, स्थानीय नागरिकों और महिला संगठनों से चर्चा करनी चाहिए थी। लेकिन सरकार ने बिना व्यापक विचार-विमर्श के निर्णय लेकर जनता की चिंताओं को नजरअंदाज किया।

कर्ण नंदा ने कहा कि अब न्यायालय की टिप्पणी के बाद सरकार का फैसला पूरी तरह कटघरे में खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई रोक यह साबित करती है कि जनता की आवाज और लोकतांत्रिक विरोध को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

भाजपा ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि कमला नेहरू अस्पताल को शिफ्ट करने के फैसले को पूरी तरह वापस लिया जाए। पार्टी का कहना है कि सरकार को अस्पताल की मौजूदा सुविधाओं को और अधिक मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए ताकि प्रदेश की महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें।

भाजपा मीडिया संयोजक ने कहा कि पार्टी महिलाओं की स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि भाजपा भविष्य में भी जनता के हितों और स्वास्थ्य सेवाओं की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

कमला नेहरू अस्पताल शिमला प्रदेश का एक महत्वपूर्ण महिला स्वास्थ्य संस्थान माना जाता है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल से जुड़े किसी भी निर्णय का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब प्रदेश सरकार की अगली रणनीति पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में बड़ा विषय बन सकता है क्योंकि यह सीधे तौर पर स्वास्थ्य सेवाओं और जनता की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। भाजपा इस मामले को सरकार की प्रशासनिक विफलता के रूप में जनता के बीच उठा रही है, जबकि सरकार की ओर से अभी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।