Students’ Federation of India द्वारा Himachal Pradesh University में आयोजित दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का दूसरे दिन प्रभावशाली समापन हुआ। कार्यक्रम में छात्रों की उत्साहपूर्ण भागीदारी, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सामाजिक मुद्दों पर हुए वैचारिक विमर्श ने विश्वविद्यालय परिसर को नई ऊर्जा और जागरूकता से भर दिया।
कार्यक्रम के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में एसएफआई के ऑल इंडिया प्रेसिडेंट Adarsh M. Saji उपस्थित रहे। वहीं गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में Subhash Jakhar तथा स्पेशल गेस्ट के रूप में Anil Thakur और सनी सेक्टा मौजूद रहे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और संकायों से जुड़े छात्रों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

दूसरे दिन का आयोजन सांस्कृतिक विविधता, छात्र एकता और सामाजिक चेतना का प्रतीक बनकर सामने आया। छात्रों ने नृत्य, गीत, नुक्कड़ नाटक, कविता पाठ और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से शिक्षा, सामाजिक समानता, बेरोजगारी और सांप्रदायिकता जैसे मुद्दों को मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि विश्वविद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और वैचारिक अभिव्यक्ति का भी महत्वपूर्ण मंच है।
मुख्य अतिथि आदर्श एम. साजी ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह नीति शिक्षा व्यवस्था में केंद्रीकरण को बढ़ावा देती है और राज्यों की स्वायत्तता को कमजोर करती है। उनके अनुसार भारत जैसे बहु-सांस्कृतिक देश में एक समान शिक्षा प्रणाली लागू करना व्यावहारिक नहीं है और इससे क्षेत्रीय पहचान पर भी असर पड़ सकता है।
उन्होंने “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे नारों का उल्लेख करते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर शिक्षा की स्थिति को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के बाद देशभर में लगभग एक लाख स्कूल बंद होने की बात सामने आई है, जो छात्रों के भविष्य के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने इसे शिक्षा के निजीकरण और व्यावसायीकरण की दिशा में बढ़ता कदम बताया।
आदर्श एम. साजी ने छात्रों से शिक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए संगठित होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और इसे कमजोर नहीं होने दिया जा सकता। उन्होंने लोकतांत्रिक तरीकों से संघर्ष करने और छात्र एकता को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया।
गेस्ट ऑफ ऑनर सुभाष जाखड़ ने अपने संबोधन में देश के वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक माहौल पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिकता, जातिवाद और क्षेत्रीयता के आधार पर समाज को बांटने की कोशिशें बढ़ रही हैं। ऐसे समय में विश्वविद्यालय में आयोजित यह सांस्कृतिक कार्यक्रम विविधता में एकता और भाईचारे का सकारात्मक संदेश देता है।

उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को जोड़ने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का प्रयास भी है। वहीं अनिल ठाकुर ने आयोजन की सफलता के लिए एसएफआई इकाई और छात्रों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
कार्यक्रम के दौरान नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में शिक्षा के निजीकरण, बेरोजगारी, सामाजिक असमानता और सांप्रदायिकता जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। छात्रों ने अपनी कला के माध्यम से यह संदेश दिया कि वे समाज में सकारात्मक बदलाव के सक्रिय भागीदार हैं।
दो दिवसीय इस सांस्कृतिक कार्यक्रम के समापन के साथ विश्वविद्यालय परिसर में नई जागरूकता और सामाजिक चेतना का संदेश देखने को मिला। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और दर्शकों का धन्यवाद करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प दोहराया।