द्राबिल स्कूल में पर्यावरण दिवस व महिला जागरूकता कार्यक्रम

rakesh nandan

06/06/2026

द्राबिल स्कूल में विश्व पर्यावरण दिवस के साथ महिला सशक्तिकरण योजनाओं पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

सिरमौर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय द्राबिल, विकास खंड शिलाई, जिला सिरमौर में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं महिला सशक्तिकरण विषयक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम जिला कार्यक्रम अधिकारी, सिरमौर के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिसमें क्षेत्र की महिलाओं, किशोरियों, पंचायत प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों तथा विभागीय अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत पर्यावरण संरक्षण की शपथ के साथ हुई। अधिकारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने पर्यावरण को स्वच्छ एवं हरित बनाए रखने तथा प्रकृति संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और सतत विकास के महत्व पर विशेष जोर दिया गया।

इस अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। प्रत्येक नागरिक को वृक्षारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता जैसे उपायों को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। कार्यक्रम का समापन “सशक्त नारी, स्वस्थ पर्यावरण” के नारे के साथ किया गया।

कार्यक्रम के दूसरे चरण में महिला एवं बाल विकास विभाग तथा जिला महिला हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वीमेन द्वारा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और महिला अधिकारों से संबंधित जागरूकता अभियान चलाया गया। प्रतिभागियों को केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी गई ताकि अधिक से अधिक लोग इनका लाभ उठा सकें।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य ललित कुमार ने की। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण किसी भी समाज और राष्ट्र के समग्र विकास की आधारशिला है। यदि महिलाओं को शिक्षा, सुरक्षा और अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो समाज तेजी से प्रगति कर सकता है।

जागरूकता सत्र के दौरान बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि बेटियों को समान अवसर देना और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना समाज की जिम्मेदारी है। साथ ही गर्भ में लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या को कानूनन अपराध बताते हुए इसके खिलाफ जागरूक रहने का संदेश दिया गया।

मासिक धर्म स्वच्छता विषय पर भी विशेष चर्चा की गई। किशोरियों और महिलाओं को बताया गया कि माहवारी एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना आवश्यक है। विशेषज्ञों ने स्वच्छ सैनिटरी नैपकिन के उपयोग, नियमित बदलाव और पौष्टिक आहार के महत्व पर जानकारी साझा की।

कार्यक्रम में दहेज निषेध अधिनियम 1961 के प्रावधानों की भी जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि दहेज लेना, देना और मांगना कानूनन अपराध है। समाज से इस कुप्रथा को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया।

महिलाओं की सुरक्षा और सहायता के लिए संचालित वन स्टॉप सेंटर ‘सखी’ की सेवाओं से भी लोगों को अवगत कराया गया। बताया गया कि हिंसा या उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को जिला अस्पताल नाहन स्थित वन स्टॉप सेंटर में पुलिस सहायता, चिकित्सा सुविधा, कानूनी परामर्श, काउंसलिंग तथा अस्थायी आश्रय जैसी सेवाएं एक ही स्थान पर निःशुल्क उपलब्ध करवाई जाती हैं।

इसके अतिरिक्त आंगनबाड़ी सह क्रेच (AWCC) योजना की जानकारी देते हुए बताया गया कि कामकाजी महिलाओं के बच्चों की देखभाल, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा के लिए यह सुविधा अत्यंत लाभकारी है। वहीं कामकाजी महिला हॉस्टल योजना के तहत बाहर पढ़ाई या नौकरी करने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित और किफायती आवास की जानकारी भी साझा की गई।

कार्यक्रम में महिलाओं को महिला हेल्पलाइन 181 और आपातकालीन सहायता नंबर 112 के बारे में भी जागरूक किया गया। अधिकारियों ने बताया कि घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, छेड़छाड़ या किसी भी संकट की स्थिति में महिलाएं इन सेवाओं का उपयोग कर तत्काल सहायता प्राप्त कर सकती हैं।

इस अवसर पर बाल विकास परियोजना अधिकारी गीता सिंगटा, सुपरवाइजर निर्मला देवी और जगमोहन सिंह, मिशन शक्ति से जिला समन्वयक कृतिका ठाकुर, जेंडर स्पेशलिस्ट सोनम परमार, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, विद्यालय के शिक्षक, छात्र-छात्राएं और विभागीय कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग दिया।