हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज होती जा रही है। भाजपा प्रदेश मीडिया सह प्रभारी रमा ठाकुर ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि किसी को प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविकता जाननी है, तो चायल सिविल अस्पताल की हालत देखना ही काफी है। उन्होंने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह बदहाल स्थिति किसी दूरस्थ क्षेत्र की नहीं, बल्कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनी राम शांडिल के अपने ही विधानसभा क्षेत्र की है।
अस्पताल खुद “आईसीयू” में
रमा ठाकुर ने तीखे शब्दों में कहा कि चायल सिविल अस्पताल, जो लगभग 40 से 50 किलोमीटर के दायरे की आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है, आज खुद ही ‘आईसीयू’ में नजर आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हैं। अधिकांश व्यवस्थाएं डेपुटेशन के सहारे चल रही हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार के पास स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर कोई ठोस योजना नहीं है।
“रेफर सेंटर” बन चुका अस्पताल
उन्होंने कहा कि हालात इतने खराब हैं कि यह अस्पताल अब उपचार का केंद्र न रहकर ‘रेफर सेंटर’ बनकर रह गया है। यहां आने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार भी ठीक से नहीं मिल पा रहा और उन्हें सीधे शिमला, सोलन या निजी अस्पतालों के लिए भेज दिया जाता है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्हें इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है।
जनता में बढ़ता आक्रोश
रमा ठाकुर ने कहा कि स्थानीय लोगों में इस लापरवाही को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का मानना है कि यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता के साथ सीधा अन्याय है। उन्होंने कहा कि जब स्वास्थ्य मंत्री के अपने क्षेत्र का यह हाल है, तो पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
विशेषज्ञों की भारी कमी
उन्होंने सरकार से मांग की कि चायल सिविल अस्पताल में जल्द से जल्द डॉक्टरों के खाली पद भरे जाएं। विशेष रूप से मेडिसिन विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति प्राथमिकता के आधार पर की जाए। इसके साथ ही अस्पताल में आवश्यक उपकरणों और बुनियादी सुविधाओं को भी तत्काल उपलब्ध कराया जाए, ताकि मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके।
सरकार को चेतावनी
रमा ठाकुर ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सरकार को स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कोई जन आंदोलन होता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और स्वास्थ्य विभाग की होगी।