भाजपा ने राज्यपाल को सौंपा चुनावी हस्तक्षेप पर विस्तृत ज्ञापन

rakesh nandan

25/05/2026

भारतीय जनता पार्टी हिमाचल प्रदेश ने नगर निकाय एवं पंचायतीराज चुनावों के दौरान आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन, चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप और लोकतांत्रिक संस्थाओं को प्रभावित करने के आरोपों को लेकर राज्यपाल को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। भाजपा ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।

ज्ञापन में भाजपा ने कहा कि पंचायतीराज संस्थाओं, जिला परिषद, बीडीसी और नगर निकायों से जुड़े चुनावों के दौरान आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू है। ऐसे समय में सरकार से निष्पक्षता और संवैधानिक मर्यादाओं के पालन की अपेक्षा की जाती है, लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा लगातार ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं जिनसे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

भाजपा ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया के बीच चेयरमैन और वाइस चेयरमैन चुनावों से जुड़े नियमों एवं अधिसूचनाओं में बदलाव करने के प्रयास लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ हैं। पार्टी ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियम बदलना जनादेश और संविधान दोनों का अपमान है।

ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-U और 243-ZA का उल्लेख करते हुए कहा गया कि स्थानीय निकायों के स्वतंत्र और समयबद्ध चुनाव संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा हैं। भाजपा ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में दायर Dinesh Sharma & Another Versus State of H.P. & Others मामले का भी हवाला दिया, जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों में देरी और हस्तक्षेप को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

भाजपा ने आरोप लगाया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को समय पर अधिकार नहीं दिए जा रहे और प्रशासनिक माध्यमों से चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। पार्टी ने कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाने और राजनीतिक प्रभाव डालने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

ज्ञापन में 22 मई 2026 को आयोजित मंत्रिमंडल बैठक का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। भाजपा का आरोप है कि आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के बावजूद कैबिनेट बैठक में कई ऐसे निर्णय लिए गए जिनका सीधा प्रभाव मतदाताओं, महिलाओं, कर्मचारियों और युवाओं पर पड़ सकता है।

भाजपा ने आरोप लगाया कि बैठक में इंदिरा गांधी प्यारी बहना योजना में बदलाव, महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह देने, 2215 पदों को भरने, 1500 शिक्षकों की भर्ती, कर्मचारियों के मानदेय बढ़ाने, प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन और नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन जैसे फैसले लिए गए। पार्टी का कहना है कि ये घोषणाएं चुनावी लाभ प्राप्त करने और मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से की गईं।

भाजपा ने राज्यपाल से मांग की है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के दौरान आयोजित मंत्रिमंडल बैठक और उसमें लिए गए फैसलों की संवैधानिक एवं प्रशासनिक समीक्षा करवाई जाए। साथ ही चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक ऐसे सभी निर्णयों और घोषणाओं के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग भी की गई है।

इसके अलावा भाजपा ने चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए सरकारी मशीनरी के उपयोग, नियमों में बदलाव और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाने के आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। पार्टी ने राज्यपाल से लोकतांत्रिक संस्थाओं, संवैधानिक मूल्यों और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।