बिलासपुर में वन अग्नि रोकथाम अभियान तेज

rakesh nandan

23/05/2026

बिलासपुर में वन अग्नि रोकथाम अभियान तेज, 45 फायर वॉचर्स संवेदनशील क्षेत्रों पर तैनात

गर्मी के मौसम की शुरुआत के साथ ही जंगलों में आग लगने की बढ़ती घटनाओं और संभावनाओं को देखते हुए बिलासपुर वन मंडल ने जिला भर में वन अग्नि रोकथाम अभियान तेज कर दिया है। वन विभाग द्वारा सतर्कता, जनजागरूकता और रोकथाम संबंधी गतिविधियों को व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है ताकि वन संपदा, वन्य जीवों और पर्यावरण को आग से होने वाली क्षति से सुरक्षित रखा जा सके।

वन मंडलाधिकारी Rajiv Kumar ने जानकारी देते हुए बताया कि जंगलों को आग से बचाने के लिए विभाग सामुदायिक सहभागिता को प्राथमिकता दे रहा है। इसके तहत जिला भर में लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वन केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं बल्कि पर्यावरण संतुलन और मानव जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण धरोहर हैं। जंगलों में लगने वाली आग से बहुमूल्य वन संपदा के साथ-साथ वन्य जीव-जंतुओं, पेड़-पौधों, घास और झाड़ियों को भी भारी नुकसान पहुंचता है।

राजीव कुमार ने बताया कि जंगलों में आग लगने से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारे और ईंधन की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है। इसके अलावा पर्यावरण प्रदूषण बढ़ने और जैव विविधता प्रभावित होने का खतरा भी रहता है।

वन विभाग द्वारा जिला के विभिन्न क्षेत्रों में सामुदायिक कार्यशालाएं और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में स्थानीय लोगों, महिला मंडलों, युवा मंडलों, सांझा वन प्रबंधन समितियों और वन विकास समितियों को शामिल किया जा रहा है।

वन मंडलाधिकारी ने बताया कि वन अग्नि की घटनाओं पर त्वरित नियंत्रण के लिए जिला में कुल 45 फायर वॉचर्स तैनात किए गए हैं। ये फायर वॉचर्स लगातार संवेदनशील वन क्षेत्रों पर निगरानी बनाए हुए हैं ताकि आग लगने की स्थिति में तुरंत सूचना मिल सके और समय रहते कार्रवाई की जा सके।

उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में आग लगने की आशंका अधिक रहती है वहां विभाग द्वारा फायर लाइनें तैयार की गई हैं। इसके अतिरिक्त सड़कों के किनारे जमा सूखी पत्तियों, घास और चिल्लर को हटाने का कार्य भी लगातार जारी है ताकि आग तेजी से न फैल सके।

वन विभाग द्वारा फील्ड स्टाफ और कर्मचारियों को भी नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के माध्यम से कर्मचारियों को आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई के लिए तैयार किया जा रहा है।

राजीव कुमार ने आम जनता से अपील की कि कोई भी व्यक्ति जानबूझकर जंगलों में आग न लगाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश आग लग जाती है तो स्थानीय लोग तुरंत एकजुट होकर आग बुझाने का प्रयास करें और इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें।

उन्होंने बताया कि जंगल में आग लगाने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत जंगल में आग लगाने वाले व्यक्ति को छह माह तक की सजा हो सकती है।

इसके अलावा सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम 1984 के तहत सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर कम से कम एक वर्ष के कारावास का प्रावधान भी मौजूद है।

वन मंडलाधिकारी ने कहा कि सरकारी जंगल की सीमा से 100 मीटर के भीतर यदि कोई व्यक्ति अपनी भूमि या घासनी में कटे हुए अवशेष जलाना चाहता है तो उसे पहले वन विभाग को इसकी सूचना देना अनिवार्य होगा।

वन विभाग ने जंगलों में आग की घटनाओं की सूचना देने के लिए टोल फ्री नंबर भी जारी किया है। नागरिक किसी भी आग की घटना की जानकारी विभागीय टोल फ्री नंबर 1800-180-1916 पर दे सकते हैं।

राजीव कुमार ने बताया कि जंगल में आग लगाने वाले व्यक्ति की सूचना देने वाले नागरिक को बिलासपुर वन मंडल की ओर से पुरस्कृत भी किया जाएगा। इससे लोगों को वन संरक्षण के लिए आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों के दौरान सूखी घास, पत्तियां और तेज हवाएं जंगलों में आग फैलने का बड़ा कारण बनती हैं। ऐसे में सामुदायिक जागरूकता और त्वरित प्रतिक्रिया बेहद जरूरी होती है।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार जंगलों में आग लगने से कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है, जिससे जलवायु परिवर्तन की समस्या और गंभीर हो सकती है। इसके अलावा कई दुर्लभ वनस्पतियां और वन्य जीव भी प्रभावित होते हैं।

वन विभाग ने जिला के सभी नागरिकों, सामाजिक संगठनों और पंचायत प्रतिनिधियों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि जंगलों को आग से बचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।

विभाग का कहना है कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर कार्य करें तो जंगलों को आग से सुरक्षित रखा जा सकता है और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत किया जा सकता है।