पधर के आरंग में मक्की की लाइन बुवाई का प्रदर्शन आयोजित

rakesh nandan

06/06/2026

पधर के आरंग क्षेत्र में मक्की की लाइन बुवाई का प्रदर्शन, किसानों को वैज्ञानिक खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण

मंडी। किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ने तथा फसल उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (एचपीसीडीपी-II) जायका-ओडीए के अंतर्गत पधर उप-परियोजना क्षेत्र के आरंग में मक्की की लाइन बुवाई का प्रदर्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन खंड परियोजना प्रबंधक इकाई मंडी द्वारा खाद्यान्न उत्पादकता कार्यक्रम के तहत किया गया।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ उन्नत कृषि तकनीकों से परिचित करवाना तथा कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में क्षेत्र के किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और वैज्ञानिक खेती की विभिन्न विधियों की जानकारी प्राप्त की।

कृषि विशेषज्ञ डॉ. पी.एल. शर्मा एवं डॉ. आर.के. शर्मा के मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण में मक्की की लाइन बुवाई का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया। विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि पारंपरिक छिटकाव विधि की तुलना में लाइन बुवाई तकनीक अधिक प्रभावी और लाभदायक मानी जाती है।

उन्होंने जानकारी दी कि लाइन बुवाई से बीज की उचित मात्रा का उपयोग सुनिश्चित होता है, जिससे अनावश्यक बीज खर्च कम होता है। साथ ही पौधों के बीच उचित दूरी बनी रहती है, जिससे उनकी वृद्धि समान रूप से होती है और फसल का विकास बेहतर तरीके से होता है।

विशेषज्ञों ने बताया कि लाइन बुवाई पद्धति अपनाने से खेत में निराई-गुड़ाई का कार्य आसानी से किया जा सकता है। इसके अलावा उर्वरकों का संतुलित उपयोग और सिंचाई प्रबंधन भी अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। इससे उत्पादन लागत कम होती है और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त होता है।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को यह भी बताया गया कि वैज्ञानिक विधि से की गई बुवाई फसल की गुणवत्ता और उत्पादकता दोनों को बढ़ाने में सहायक होती है। पौधों को पर्याप्त पोषण और सूर्य प्रकाश मिलने के कारण उनकी वृद्धि बेहतर होती है तथा रोग और कीटों का प्रभाव भी अपेक्षाकृत कम होता है।

प्रदर्शन कार्यक्रम के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को उन्नत किस्मों के चयन के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उन्नत और प्रमाणित बीजों का चयन अत्यंत आवश्यक है।

इसके अतिरिक्त संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के उपाय, खरपतवार नियंत्रण तथा फसल संरक्षण संबंधी विभिन्न तकनीकों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। किसानों को बताया गया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करने से फसल को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में मिलते हैं और उत्पादन में वृद्धि होती है।

विशेषज्ञों ने फसल संरक्षण के आधुनिक उपायों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने किसानों को कीट एवं रोग नियंत्रण के वैज्ञानिक तरीकों, जैविक उपायों और एकीकृत फसल प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने की सलाह दी।

कार्यक्रम में शामिल किसानों ने वैज्ञानिक खेती की इन तकनीकों में गहरी रुचि दिखाई। कई किसानों ने लाइन बुवाई तकनीक को अपने खेतों में अपनाने की इच्छा व्यक्त की और विशेषज्ञों से व्यावहारिक सुझाव भी प्राप्त किए। किसानों ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम खेती को अधिक लाभदायक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

खंड परियोजना प्रबंधक मंडी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि एचपीसीडीपी-II परियोजना का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि करना और कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देना है। इसके तहत विभिन्न क्षेत्रों में समय-समय पर प्रशिक्षण, प्रदर्शन और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि किसान वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाते हैं तो उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत को भी कम किया जा सकता है। इससे कृषि व्यवसाय अधिक लाभकारी और टिकाऊ बन सकता है।

इस अवसर पर डॉ. हंसराज, कृषि विकास अधिकारी, जायका परियोजना के अधिकारी एवं कर्मचारी, कृषक विकास संघ के पदाधिकारी, ग्राम पंचायत के प्रधान और उपप्रधान सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समापन किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने और कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित करने के साथ हुआ। विशेषज्ञों ने विश्वास जताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को आत्मनिर्भर और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।