Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने आज विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्रों ने सहायक परीक्षा नियंत्रक कार्यालय का घेराव करते हुए बढ़ी हुई फीस और परीक्षा प्रणाली को लेकर विरोध जताया।
प्रदर्शन में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अचानक फीस में भारी बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
एबीवीपी इकाई मंत्री सुशील शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में लगभग 10 वर्षों बाद अचानक इतनी अधिक फीस बढ़ाना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यह फैसला भविष्य में सरकारी शिक्षण संस्थानों को कमजोर करने का संकेत माना जा सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब एवं मध्यम वर्गीय छात्र बड़ी कठिनाइयों के बाद विश्वविद्यालय तक पहुंचते हैं। ऐसे में भारी-भरकम फीस वृद्धि के कारण अब छात्र सरकारी विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने से पहले भी कई बार सोचने पर मजबूर होंगे।
सुशील शर्मा ने कहा कि उच्च शिक्षा सभी वर्गों के लिए सुलभ होनी चाहिए, लेकिन फीस में बढ़ोतरी से शिक्षा महंगी होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की समस्याओं को समझने में विफल रहा है।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने परीक्षा प्रणाली को लेकर भी कई सवाल उठाए। एबीवीपी ने मांग की कि सेमेस्टर परीक्षाओं के बीच छात्रों को कम से कम दो दिन का अवकाश दिया जाए ताकि वे बेहतर तैयारी कर सकें।
छात्रों का कहना था कि वर्तमान परीक्षा कार्यक्रम में कई बार छात्रों को एक ही दिन में दो परीक्षाएं देनी पड़ रही हैं। इसके अतिरिक्त केवल एक दिन के अवकाश में दो परीक्षाओं की तैयारी करना बेहद कठिन और तनावपूर्ण स्थिति पैदा करता है।
एबीवीपी नेताओं ने कहा कि री-अपीयर परीक्षाएं फ्रेश कैपेसिटी की परीक्षाओं के समाप्त होने के बाद आयोजित की जानी चाहिए। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था छात्रों के मानसिक दबाव और शैक्षणिक प्रदर्शन दोनों को प्रभावित कर रही है।
प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि हाउस एग्जाम के दौरान विद्यार्थियों को स्वयं उत्तर पुस्तिकाएं खरीदकर लानी पड़ रही हैं। छात्रों के अनुसार यह विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं और संसाधनों की स्थिति को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि एक सार्वजनिक विश्वविद्यालय में छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिकाएं स्वयं खरीदने के लिए मजबूर करना शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। छात्रों ने मांग की कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस व्यवस्था को तुरंत समाप्त करे।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने प्रशासनिक भवन के बाहर एकत्र होकर अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए। एबीवीपी का दावा है कि इस घेराव में लगभग 150 से अधिक छात्रों ने भाग लिया।
विद्यार्थी परिषद ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि छात्रों की मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया तो संगठन आंदोलन को और तेज करेगा। संगठन ने कहा कि छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों पर किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
राजनीतिक और शैक्षणिक विश्लेषकों का मानना है कि विश्वविद्यालयों में फीस वृद्धि और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे लगातार छात्रों के बीच असंतोष का कारण बन रहे हैं। बढ़ती महंगाई और आर्थिक चुनौतियों के बीच फीस में वृद्धि का असर विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में शिक्षा को सुलभ बनाए रखने के लिए प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच संवाद बेहद जरूरी है। इससे छात्रों की समस्याओं को समझने और समाधान निकालने में मदद मिल सकती है।
एबीवीपी ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए और फीस वृद्धि तथा परीक्षा प्रणाली से जुड़े फैसलों पर पुनर्विचार करना चाहिए। संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले समय में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
प्रदर्शन के अंत में छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से शिक्षा को सस्ती, सुलभ और छात्र हितैषी बनाए रखने की मांग दोहराई।