एचपीयू में फीस वृद्धि के खिलाफ एसएफआई का प्रदर्शन

rakesh nandan

22/05/2026

एचपीयू में फीस वृद्धि के खिलाफ एसएफआई का प्रदर्शन, शुल्क वापसी की मांग तेज

Students’ Federation of India (एसएफआई) की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा हाल ही में की गई फीस वृद्धि के विरोध में विश्वविद्यालय परिसर में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों और विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने भाग लिया।

प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए फीस वृद्धि के फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की। एसएफआई ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन का यह निर्णय शिक्षा के अधिकार पर सीधा हमला है और इससे गरीब तथा मध्यमवर्गीय छात्रों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना और कठिन हो जाएगा।

संगठन ने कहा कि फीस वृद्धि का सबसे अधिक असर ग्रामीण क्षेत्रों, किसान-मजदूर परिवारों, अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से आने वाले छात्रों पर पड़ेगा। एसएफआई के अनुसार हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में पहले ही बड़ी संख्या में विद्यार्थी आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और ऐसे में शुल्क बढ़ाना शिक्षा को महंगा और असुलभ बनाने जैसा है।

एसएफआई ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा परीक्षा शुल्क, छात्रावास शुल्क, पुनर्मूल्यांकन शुल्क, मरम्मत शुल्क तथा अन्य कई मदों में भारी बढ़ोतरी की गई है। संगठन का कहना है कि इससे छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए एसएफआई सचिव कामरेड मुकेश ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी प्रशासनिक विफलताओं और वित्तीय कुप्रबंधन का बोझ छात्रों पर डालने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय आर्थिक संकट की बात करता है, तो पहले उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि पिछले वर्षों में विश्वविद्यालय के संसाधनों और फंड का उपयोग किस प्रकार किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में वित्तीय योजना और जवाबदेही की गंभीर कमी रही है, जिसका खामियाजा अब छात्रों से वसूला जा रहा है। एसएफआई का कहना है कि सार्वजनिक विश्वविद्यालयों का उद्देश्य सस्ती और सुलभ शिक्षा उपलब्ध करवाना होना चाहिए, न कि शिक्षा को व्यापारिक मॉडल में बदलना।

प्रदर्शन के दौरान संगठन ने हालिया कैग रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। एसएफआई नेताओं ने दावा किया कि Comptroller and Auditor General of India (कैग) की रिपोर्ट में लगभग 186 शिक्षकों की नियुक्तियों और पदोन्नतियों में अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया है।

संगठन ने सवाल उठाया कि यदि विश्वविद्यालय में इतने बड़े स्तर पर अनियमितताओं के आरोप हैं, तो उनकी जिम्मेदारी तय करने के बजाय छात्रों पर आर्थिक बोझ क्यों डाला जा रहा है। एसएफआई ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की गलतियों और कथित भ्रष्टाचार की कीमत छात्रों से नहीं वसूली जानी चाहिए।

संगठन ने आरोप लगाया कि बिना ठोस योजना के संसाधनों के उपयोग और प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण विश्वविद्यालय आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। अब इस संकट से निकलने के लिए फीस वृद्धि का रास्ता अपनाया जा रहा है, जो छात्रों के हितों के खिलाफ है।

एसएफआई नेताओं ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय वास्तव में वित्तीय संकट को दूर करना चाहता है, तो उसे पहले अनावश्यक खर्चों पर रोक लगानी चाहिए और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। इसके साथ ही राज्य सरकार और संबंधित संस्थाओं से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के प्रयास भी किए जाने चाहिए।

संगठन ने कहा कि विश्वविद्यालय में लगातार फीस बढ़ाने की प्रवृत्ति चिंताजनक है। पहले भी विभिन्न शुल्कों में बढ़ोतरी की जा चुकी है और अब एक बार फिर छात्रावास शुल्क, परीक्षा शुल्क और अन्य फीस में वृद्धि ने छात्रों की समस्याओं को और बढ़ा दिया है।

विशेष रूप से शोधार्थियों और दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए यह फैसला गंभीर आर्थिक चुनौती बन सकता है। एसएफआई ने कहा कि मौजूदा समय में बेरोजगारी और महंगाई पहले से ही बढ़ रही है और ऐसे में छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना असंवेदनशील रवैया दर्शाता है।

संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्रों से संवाद न करने का आरोप भी लगाया। एसएफआई के अनुसार फीस वृद्धि जैसा महत्वपूर्ण निर्णय छात्र संगठनों और संबंधित पक्षों से चर्चा किए बिना लागू करना अलोकतांत्रिक रवैया है।

एसएफआई ने मांग की कि विश्वविद्यालय प्रशासन हालिया फीस वृद्धि को तत्काल प्रभाव से वापस ले। संगठन ने परीक्षा शुल्क, छात्रावास शुल्क, पुनर्मूल्यांकन शुल्क, मरम्मत शुल्क और अन्य सभी बढ़ाए गए शुल्कों को रद्द करने की मांग उठाई।

इसके साथ ही संगठन ने विश्वविद्यालय के वित्तीय प्रबंधन और कैग रिपोर्ट में उठाए गए सवालों की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच करवाने की मांग भी की।

प्रदर्शन के अंत में एसएफआई ने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जल्द फीस वृद्धि वापस नहीं ली, तो संगठन विश्वविद्यालय स्तर से लेकर राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेगा। संगठन ने कहा कि छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।