सिरमौर में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया गया

rakesh nandan

22/05/2026

सिरमौर के घड़ासर गांव में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया गया

Botanical Survey of India के हाई एल्टीट्यूड वेस्टर्न हिमालयन रीजनल सेंटर (एचएडब्ल्यूएचआरसी), नौणी सोलन द्वारा शुक्रवार को जिला सिरमौर के घड़ासर गांव में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन “स्थानीय स्तर पर कार्य, वैश्विक प्रभाव” थीम के अंतर्गत किया गया।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समुदायों में जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा आर्थिक एवं पर्यावरणीय महत्व रखने वाले पौधों के संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरित करना था। कार्यक्रम में गांव के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. रवनीत सिंह रहे, जो बीएसआई सोलन में ओसी के पद पर कार्यरत हैं। कार्यक्रम का संचालन और समन्वय डॉ. के.एस. डोगरा द्वारा किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत बीएसआई सोलन के प्रमुख डॉ. कुमार अम्बरीश के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने अपने संबोधन में जैव विविधता के महत्व और उसके संरक्षण की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में जैव विविधता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और इसके संरक्षण के लिए सामुदायिक भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

डॉ. कुमार अम्बरीश ने ग्रामीणों द्वारा पर्यावरण संरक्षण और पौधों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी के बिना जैव विविधता संरक्षण के लक्ष्य को हासिल करना संभव नहीं है।

मुख्य अतिथि डॉ. रवनीत सिंह ने ग्रामीणों को वन्य जीव संसाधनों और उन पर मंडरा रहे खतरों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तेजी से बदलते पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण कई वनस्पतियां और जीव प्रजातियां खतरे में हैं।

उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं और आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण को सुरक्षित रखने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे प्रयास भी वैश्विक स्तर पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को चारा, औषधीय और इमारती प्रजातियों सहित कुल 70 पौधों के पौधे वितरित किए गए। इन पौधों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाना और उपयोगी वनस्पतियों के संरक्षण को प्रोत्साहित करना था।

विशेष रूप से भोजपत्र के पौधे का रोपण गांव के मंदिर के समीप किया गया। भोजपत्र हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण और सांस्कृतिक दृष्टि से मूल्यवान वनस्पति मानी जाती है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने पौधारोपण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

कार्यक्रम के दौरान गांव की एक बुजुर्ग महिला और एक बुजुर्ग पुरुष को पर्यावरण एवं संरक्षण कार्यों में उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया। आयोजकों ने कहा कि स्थानीय लोगों के अनुभव और परंपरागत ज्ञान पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस अवसर पर गांव के 60 से अधिक लोगों ने भाग लिया। ग्रामीणों ने जैव विविधता संरक्षण से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा किए और पौधों तथा प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझने का प्रयास किया।

कार्यक्रम में बीएसआई, एचएडब्ल्यूएचआरसी सोलन के कर्मचारी ब्रजेश मीणा, आसिम अली, रितिश कुमार सिंह, संजीव कुमार और हिमानी शर्मा भी उपस्थित रहे। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन और पौधों के वितरण में सहयोग दिया।

आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के ग्राम स्तरीय कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना और जैव विविधता के महत्व को समाज तक पहुंचाना है।

बीएसआई, एचएडब्ल्यूएचआरसी सोलन ने इस प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजन के लिए निदेशक डॉ. कनाड दास का विशेष आभार व्यक्त किया। संस्थान ने भविष्य में भी ग्रामीण क्षेत्रों में जैव विविधता संरक्षण से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।

विशेषज्ञों का मानना है कि जैव विविधता संरक्षण आज वैश्विक स्तर की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। वनस्पतियों और वन्य जीवों की विविधता पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, जलवायु नियंत्रण और मानव जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित ऐसे कार्यक्रम लोगों को प्रकृति से जोड़ने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करने में सहायक साबित होते हैं।