ऊना में जिला परिषद उम्मीदवारों के लिए खर्च सीमा तय

rakesh nandan

22/05/2026

ऊना में जिला परिषद उम्मीदवारों के लिए चुनावी खर्च सीमा तय, प्रशासन ने जारी किए दिशा-निर्देश

पंचायती राज संस्थाओं के सामान्य चुनाव-2026 को लेकर जिला प्रशासन ऊना ने जिला परिषद सदस्य पद के चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए निर्वाचन व्यय संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी प्रत्याशियों को चुनावी खर्च का सही और पारदर्शी लेखा रखना अनिवार्य होगा।

जिला प्रशासन के अनुसार पंचायत चुनाव 26 मई, 28 मई और 30 मई 2026 को तीन चरणों में आयोजित किए जाएंगे। चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से उम्मीदवारों के निर्वाचन व्यय पर निगरानी रखने के लिए विशेष प्रावधान लागू किए गए हैं।

जारी निर्देशों के अनुसार Himachal Pradesh Panchayati Raj (Election) Rules, 1994 के नियम-92 के तहत प्रत्येक प्रत्याशी को अपने निर्वाचन व्यय का पृथक और सही लेखा निर्धारित प्रपत्र-44 में प्रतिदिन के आधार पर संधारित करना होगा।

प्रशासन ने जिला परिषद सदस्य पद के लिए चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के लिए चुनावी खर्च की अधिकतम सीमा 1 लाख रुपये निर्धारित की है। इसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया में अनावश्यक धनबल के उपयोग को रोकना और सभी उम्मीदवारों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है।

निर्देशों में कहा गया है कि उम्मीदवारों को निर्वाचन व्यय से संबंधित सभी अभिलेख, वाउचर, रसीदें और अन्य आवश्यक दस्तावेज सुरक्षित रखने होंगे। आवश्यकता पड़ने पर इन दस्तावेजों को जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) या राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिकृत अधिकारी के समक्ष निरीक्षण के लिए प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

इसके अतिरिक्त उम्मीदवारों को निर्वाचन व्यय का पूरा विवरण निर्धारित प्रपत्र-45 में जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) को प्रस्तुत करना होगा। इस व्यय विवरण के साथ संबंधित घोषणा प्रपत्र-46 भी संलग्न करना आवश्यक होगा।

निर्वाचन व्यय के दस्तावेजों की जांच और सत्यापन के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) द्वारा उक्त लेखे का प्रमाणीकरण प्रपत्र-47 में किया जाएगा।

प्रशासन ने कहा कि चुनावी खर्च से जुड़े नियमों का पालन करना सभी उम्मीदवारों की जिम्मेदारी है। यदि कोई प्रत्याशी निर्धारित सीमा से अधिक खर्च करता है या निर्वाचन व्यय का सही लेखा प्रस्तुत नहीं करता है, तो उसके खिलाफ निर्वाचन नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

जिला प्रशासन का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए चुनावी खर्च की नियमित निगरानी की जाएगी। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को भी आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी खर्च की सीमा तय करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे चुनावों में धनबल के प्रभाव को नियंत्रित करने और सामान्य उम्मीदवारों को भी बराबरी का अवसर देने में मदद मिलती है।

चुनाव विशेषज्ञों के अनुसार पंचायत चुनावों में स्थानीय स्तर पर खर्च की निगरानी और सही लेखा प्रणाली बेहद महत्वपूर्ण होती है। इससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ती है और विवादों की संभावना कम होती है।

जिला प्रशासन ने सभी उम्मीदवारों से निर्वाचन व्यय संबंधी नियमों और प्रावधानों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि पंचायत चुनावों को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न करवाने के लिए सभी पक्षों का सहयोग आवश्यक है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों के खर्च पर लगातार नजर रखी जाएगी। प्रचार सामग्री, वाहन उपयोग, जनसभाएं, पोस्टर, बैनर और अन्य चुनावी गतिविधियों पर होने वाले खर्च का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा।

इसके अलावा उम्मीदवारों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सभी खर्च निर्धारित बैंकिंग और दस्तावेजी प्रक्रिया के अनुरूप दर्ज किए जाएं। प्रशासन का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया में जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करना है।

जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि पंचायत चुनाव लोकतंत्र की जमीनी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इन चुनावों को स्वच्छ एवं निष्पक्ष वातावरण में संपन्न करवाने के लिए निर्वाचन आयोग के सभी नियमों का पालन आवश्यक है।

उन्होंने उम्मीदवारों से अपील की कि वे चुनाव प्रचार के दौरान निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों और आदर्श आचार संहिता का भी पालन करें ताकि चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।