शिमला में त्रिवेणी बाबा ने रोपी त्रिवेणी, पर्यावरण संरक्षण संदेश

rakesh nandan

03/06/2026

शिमला स्थित हरियाणा अतिथि गृह में पर्यावरण संरक्षण को समर्पित एक विशेष पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें विख्यात पर्यावरण प्रेमी एवं “त्रिवेणी बाबा” के नाम से प्रसिद्ध समाजसेवी ने त्रिवेणी रोपित कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर मीडिया वैलबीइंग एसोसिएशन के नॉर्थ इंडिया सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और वरिष्ठ पत्रकार संजय भुटानी ने अपनी पत्नी मुक्ता भुटानी तथा अन्य सहयोगियों के साथ पौधरोपण अभियान में भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान संजय भुटानी ने कहा कि देवभूमि हिमाचल प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता और स्वच्छ पर्यावरण के लिए पूरे देश में विशेष पहचान रखता है। ऐसे प्रदेश में त्रिवेणी रोपित करना सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि हिमाचल हमें प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का महत्वपूर्ण संदेश देता है तथा इस संदेश को आगे बढ़ाने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर त्रिवेणी बाबा ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि उन्हें शिमला में त्रिवेणी रोपित करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है और वे यहां आने वाले सभी पर्यटकों से आग्रह करते हैं कि वे देश के किसी भी हिस्से से हिमाचल आएं, तो अपने साथ एक पौधा अवश्य लाएं और उसे रोपित करें।

उन्होंने कहा कि आज लगाया गया एक पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर बन सकता है। यदि हम अभी से प्रकृति संरक्षण के लिए गंभीर प्रयास नहीं करेंगे तो भविष्य में पर्यावरणीय चुनौतियां और अधिक गंभीर हो सकती हैं।

त्रिवेणी बाबा ने बताया कि उन्होंने लगभग 35 वर्ष पूर्व एक ऐसी मुहिम की शुरुआत की थी, जिसका प्रभाव आज हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे देश में दिखाई दे रहा है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनके समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 35 वर्षों में शायद ही कोई ऐसा दिन रहा हो, जब उन्होंने कम से कम एक पौधा या एक त्रिवेणी न लगाई हो।

उन्होंने जानकारी दी कि जनसहयोग से अब तक लगभग 5 लाख त्रिवेणी और करीब 50 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। उनका लक्ष्य देशभर में 10 लाख त्रिवेणी और एक करोड़ पौधे लगाने का है। इसके माध्यम से वे त्रिवेणी के महत्व को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना चाहते हैं।

त्रिवेणी बाबा ने कहा कि पिछले तीन दशकों के दौरान उन्होंने पौधरोपण को केवल एक पर्यावरणीय गतिविधि तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे भारतीय संस्कारों, सामाजिक परंपराओं और विभिन्न पारिवारिक आयोजनों से भी जोड़ने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि यदि पौधरोपण को सामाजिक संस्कृति का हिस्सा बनाया जाए तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़े परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए पांच महत्वपूर्ण संकल्प भी साझा किए। पहला, प्रत्येक व्यक्ति को अपना जन्मदिन पौधरोपण के साथ मनाना चाहिए और जीवन में कम से कम एक त्रिवेणी अवश्य लगानी चाहिए। दूसरा, पानी का सदुपयोग करना और जल संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए।

तीसरे संकल्प के रूप में उन्होंने प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और कपड़े या जूट के थैलों को अपनाने की अपील की। चौथे बिंदु में ऊर्जा संरक्षण को आवश्यक बताया और पांचवें संकल्प के रूप में भोजन की बर्बादी रोकने का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक इन पांच संकल्पों को अपने जीवन में अपनाए तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन संभव है। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं।

कार्यक्रम में हरियाणा अतिथि गृह के कर्मचारी अमर सिंह, मीनू शर्मा, अजीत सिंह, राकेश और अमन सहित कई अन्य लोग भी उपस्थित रहे। सभी ने पौधरोपण अभियान में भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।

यह कार्यक्रम केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पर्यावरण जागरूकता, जनभागीदारी और प्रकृति संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी देकर गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अभियान समाज में पर्यावरण के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।