छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित फीस बढ़ोतरी का कड़ा विरोध किया है। SFI का आरोप है कि आर्थिक बोझ का हवाला देकर विश्वविद्यालय और प्रदेश के कॉलेजों में फीस बढ़ाने की तैयारी की जा रही है, जिससे छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा।
🎓 छात्र हितों के खिलाफ बताया फैसला
राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर ने कहा कि फीस बढ़ोतरी का प्रस्ताव छात्र हितों के खिलाफ है और इससे उच्च शिक्षा आम छात्रों की पहुंच से दूर हो जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन आर्थिक संसाधनों का सही उपयोग नहीं कर पा रहा है, जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
⚠️ विश्वविद्यालय पर गंभीर आरोप
SFI ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए—
- बिना योग्यता के लगभग 186 प्रोफेसरों की नियुक्ति
- संसाधनों का दुरुपयोग
- छात्रावास और परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी
- परीक्षा प्रणाली में अनियमितताएं
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के पास अपनी बसें नहीं हैं, जिसके कारण हर महीने भारी किराया देना पड़ रहा है, जबकि उसी लागत में नई बसें खरीदी जा सकती हैं।
📊 परीक्षा प्रणाली पर सवाल
SFI ने परीक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। आरोप है कि—
- महंगे दरों पर पेपर जांच करवाई जा रही है
- परीक्षा निरीक्षकों को अतिरिक्त भुगतान किया जा रहा है
- छात्रों को फेल कर पुनर्मूल्यांकन के जरिए फीस वसूली बढ़ाई जा रही है
संगठन का दावा है कि पुनरीक्षण शुल्क में लगभग 75% तक बढ़ोतरी की गई है, जिससे छात्रों पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया है।
🚩 आंदोलन की चेतावनी
SFI ने स्पष्ट किया है कि यदि फीस बढ़ोतरी और अन्य कथित छात्र विरोधी निर्णय वापस नहीं लिए गए, तो संगठन प्रदेशभर में छात्रों को लामबंद कर आंदोलन करेगा। संगठन ने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार के आंदोलन की जिम्मेदारी राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।