Himachal Pradesh University में मंगलवार को छात्र संगठन Students Federation of India (एसएफआई) के नेतृत्व में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया गया। एसएफआई हिमाचल प्रदेश अखिल भारतीय कमेटी के आह्वान पर आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए और विश्वविद्यालय परिसर में विरोध मार्च निकालते हुए केंद्र सरकार तथा एनटीए के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय के लाल चौक पर छात्रों का भारी जमावड़ा देखने को मिला। एसएफआई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय सचिव Mukesh ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था और करोड़ों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली किसी भी संस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में लगातार धांधली और पेपर लीक की घटनाओं ने छात्रों का भरोसा तोड़ दिया है।
प्रदर्शन के दौरान एसएफआई कार्यकर्ताओं ने एनटीए का पुतला भी फूंका और बाद में सड़क पर चक्का जाम कर दिया। इस कारण समर हिल और आसपास के क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था कुछ समय के लिए पूरी तरह प्रभावित रही। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और परीक्षा एजेंसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
एसएफआई नेताओं ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि हाल ही में NEET और NET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में सामने आई पेपर लीक और भ्रष्टाचार की घटनाओं ने देश की शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संगठन का आरोप है कि इन घटनाओं के कारण लाखों मेहनती छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है।
छात्र नेताओं ने कहा कि एनटीए जैसी केंद्रीकृत एजेंसियां शिक्षा के निजीकरण और राजनीतिक हस्तक्षेप को बढ़ावा दे रही हैं। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता समाप्त होती जा रही है और पेपर लीक माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मेहनत और वर्षों की तैयारी कुछ लोगों की लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है।
एसएफआई ने मांग की कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को तत्काल भंग किया जाए और परीक्षा घोटालों की जांच सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में गठित उच्च स्तरीय समिति से करवाई जाए। संगठन ने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर उन्हें कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।
छात्र नेताओं ने यह भी कहा कि यह पहली बार नहीं है जब राष्ट्रीय परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आया हो। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2024 में भी नेट परीक्षा को लेकर इसी प्रकार की अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। एसएफआई का आरोप है कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से आयोजित करने में विफल रही है।
प्रदर्शन के दौरान एसएफआई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी मांग उठाई। संगठन का कहना है कि शिक्षा मंत्री अपनी जिम्मेदारियों पर खरे नहीं उतर पाए हैं और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने में असफल रहे हैं।
छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाए और प्रभावित छात्रों को न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। एसएफआई ने कहा कि वह इस आंदोलन को प्रदेश के हर कॉलेज और गांव तक लेकर जाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर संसद का घेराव भी किया जाएगा।
संगठन ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई केवल एक परीक्षा या किसी एक संस्था के खिलाफ नहीं बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे और गरीब एवं मध्यम वर्गीय छात्रों के शिक्षा के अधिकार को बचाने की लड़ाई है। छात्रों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
विश्वविद्यालय परिसर में हुए इस प्रदर्शन को लेकर पूरे दिन चर्चा का माहौल बना रहा। बड़ी संख्या में छात्रों की मौजूदगी और सड़क जाम के कारण क्षेत्र में यातायात प्रभावित हुआ, हालांकि बाद में पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में स्थिति सामान्य करवाई गई।