रेणुका बांध विस्थापितों की बैठक, आंदोलन की चेतावनी

rakesh nandan

05/05/2026

Renuka Ji क्षेत्र में प्रस्तावित रेणुका बांध परियोजना को लेकर विस्थापितों की चिंताएं एक बार फिर सामने आई हैं। Renuka Dam Displaced Sangharsh Samiti की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें दर्जनों लोगों ने भाग लेकर अपनी मांगों और समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की।

बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष Vijay Thakur ने की। इस दौरान विस्थापित परिवारों को मिलने वाली सुविधाओं, मुआवजे और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। विशेष रूप से हाउसलेस श्रेणी में आने वाले परिवारों को मिलने वाली ग्रांट पर चर्चा की गई, जिसे लेकर लोगों में असंतोष देखा गया।

बैठक में यह भी मुद्दा उठाया गया कि छह ऐसे परिवार हैं जिन्हें Himachal Pradesh Power Corporation Limited द्वारा हटाने की तैयारी की जा रही है। इस पर विस्थापितों ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि जब तक उनकी मुख्य मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि डूब क्षेत्र में किसी भी प्रकार की टेस्टिंग नहीं होने दी जाएगी, जब तक विस्थापितों की मांगों का समाधान नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया है और यदि जरूरत पड़ी तो इसके खिलाफ आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

बैठक में यह जानकारी भी साझा की गई कि संबंधित अधिकारियों द्वारा आश्वासन दिया गया है कि विस्थापितों की जमीन से जुड़े मुद्दों पर उच्च स्तर पर चर्चा की जाएगी। साथ ही यह भी कहा गया कि एक महीने के भीतर विस्थापितों के लिए सकारात्मक निर्णय सामने आ सकता है। इसके अलावा 10 दिनों के भीतर हाउसलेस परिवारों को संबंधित पत्र जारी करने का भरोसा भी दिया गया है।

समिति ने परियोजना के तहत चल रहे निर्माण कार्यों पर भी सवाल उठाए। विशेष रूप से पटेल कंपनी द्वारा किए जा रहे टनल निर्माण कार्य को लेकर आपत्ति जताई गई। समिति का कहना है कि अभी तक वन एवं पर्यावरण विभाग से आवश्यक अनुमति प्राप्त नहीं हुई है, इसके बावजूद पेड़-पौधों की कटाई की जा रही है, जो नियमों का उल्लंघन है।

इसके अलावा निर्माण कार्य के दौरान निकलने वाले मलबे को नदी में डाले जाने का भी मुद्दा उठाया गया। समिति ने कहा कि कंपनी द्वारा इसके लिए डंपिंग साइट निर्धारित की गई है, लेकिन इसके बावजूद मलबा सीधे नदी में डाला जा रहा है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है।

इस मामले में Forest Department Himachal Pradesh के अधिकारियों से भी बातचीत की गई है। संबंधित अधिकारी ने आश्वासन दिया कि यदि इस प्रकार की अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को अनदेखा किया गया और निर्माण कार्यों में नियमों का उल्लंघन जारी रहा, तो वे आने वाले समय में निर्माण कार्य को पूरी तरह से बंद करवा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा के लिए है और इसे किसी भी हाल में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

बैठक में संयोजक Vinod Thakur, सह-कोषाध्यक्ष Kamal Raj Sharma, सलाहकार Satpal Tomar, Puran Chand Sharma, Rajesh Sharma सहित कई अन्य सदस्यों ने भाग लिया।

कुल मिलाकर, यह बैठक विस्थापितों की समस्याओं और उनके अधिकारों को लेकर एकजुटता का संदेश देती है। आने वाले समय में यदि समाधान नहीं निकलता है, तो यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है।