भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Rajeev Bindal ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर नगर निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को प्रभावित करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu के नेतृत्व वाली सरकार लगातार लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं, संवैधानिक मूल्यों और स्थापित परंपराओं को कमजोर करने का कार्य कर रही है।
डॉ. राजीव बिंदल ने आरोप लगाया कि पंचायती राज चुनावों का आयोजन निर्धारित समय के अनुसार अक्तूबर-नवंबर 2025 में होना चाहिए था, लेकिन राज्य सरकार ने इन्हें समय पर आयोजित नहीं किया। उनके अनुसार चुनावों में देरी के कारण प्रदेश संवैधानिक संकट जैसी स्थिति में पहुंच गया था। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता सर्वोच्च न्यायालय की आभारी है, जिसके हस्तक्षेप और आदेशों के बाद चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ सकी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि प्रदेश की जनता कांग्रेस सरकार की नीतियों, चुनावी वादों और शासन व्यवस्था से निराश है तथा स्थानीय निकाय चुनावों में इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी और सरकार अब प्रशासनिक प्रभाव, राजनीतिक दबाव और अन्य साधनों के माध्यम से नगर परिषदों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
डॉ. बिंदल ने कहा कि 17 मई को नगर निकाय चुनाव संपन्न हुए थे, लेकिन निर्वाचित पार्षदों की अधिसूचना समय पर जारी नहीं की गई। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में भाजपा को न्यायालय का रुख करना पड़ा, जिसके बाद अधिसूचना जारी की गई। उनके अनुसार यह स्थिति चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनावों से संबंधित प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया। भाजपा नेता ने कहा कि वर्षों से चली आ रही चुनावी प्रक्रिया में अचानक संशोधन कर दिया गया, जिससे लोकतांत्रिक परंपराओं को आघात पहुंचा है।
राजीव बिंदल के अनुसार राज्य सरकार ने 27 मई 2026 को अधिसूचना जारी कर नगर निकाय चुनाव नियमों में संशोधन किया। उन्होंने कहा कि नए नियमों के तहत अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए बैठक बुलाने का अधिकार उपायुक्त को दिया गया है, जिससे चुनावी प्रक्रिया की समय-सीमा और पारंपरिक व्यवस्था में बदलाव आया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस नई व्यवस्था से निर्वाचित प्रतिनिधियों पर प्रभाव डालने और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए अतिरिक्त समय उपलब्ध हो सकता है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ होने के बाद नियमों या कानूनों में संशोधन करना लोकतांत्रिक सिद्धांतों और निर्वाचन व्यवस्था की भावना के विपरीत माना जाता है।
डॉ. बिंदल ने कहा कि यदि चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियम बदले जाते हैं तो इससे जनता के विश्वास को ठेस पहुंचती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अपने राजनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए यह संशोधन किया है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता ने पंचायतों और नगर निकायों में अपना जनादेश दे दिया है और किसी भी सरकार का दायित्व उस जनादेश का सम्मान करना होता है। लेकिन कांग्रेस सरकार, उनके अनुसार, जनादेश को स्वीकार करने के बजाय उसे अपने पक्ष में मोड़ने का प्रयास कर रही है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी लोकतंत्र, संविधान और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कहीं भी जनादेश के साथ छेड़छाड़ या सत्ता के दुरुपयोग का प्रयास किया जाता है तो भाजपा लोकतांत्रिक और कानूनी स्तर पर उसका विरोध करेगी।
उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय और पंचायती राज संस्थाएं लोकतंत्र की बुनियाद हैं और इन संस्थाओं की स्वतंत्रता एवं निष्पक्षता बनाए रखना आवश्यक है। किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर सकता है।
डॉ. बिंदल ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश की जनता लोकतंत्र के महत्व को समझती है और समय आने पर लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ खिलवाड़ करने वालों को उचित जवाब देगी। उन्होंने कहा कि भाजपा जनता के हितों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में नगर निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावी परिणामों तथा नेतृत्व चयन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। चुनावों के बाद विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर जनादेश की व्याख्या कर रहे हैं और स्थानीय निकायों में नेतृत्व को लेकर रणनीतियां तैयार की जा रही हैं।