पांवटा साहिब में खालसा साजना दिवस पर संगोष्ठी

rakesh nandan

17/04/2026

हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब में खालसा साजना दिवस के उपलक्ष्य में एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम गुरु की नगरी पांवटा साहिब स्थित गुरुद्वारा बाबा कृपाल दास परिसर में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, युवाओं और विभिन्न राज्यों से आए वक्ताओं ने भाग लिया।

इस संगोष्ठी में नरेंद्र सिंह बिंद्रा, अध्यक्ष हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उनके अलावा हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और उत्तराखंड से आए विद्वानों और वक्ताओं ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर अपने विचार साझा किए।

संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को सिख इतिहास और विरासत से जोड़ना और उन्हें अपने जीवन में इन मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करना था। वक्ताओं ने अपने संबोधन में गुरु साहिबान के जीवन, उनके आदर्शों और शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के समय में युवाओं को अपने इतिहास से जुड़ना अत्यंत आवश्यक है।

मीडिया से बातचीत करते हुए नरेंद्र सिंह बिंद्रा ने बताया कि इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन विशेष रूप से युवाओं को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में युवा पीढ़ी कई चुनौतियों का सामना कर रही है, जिनमें नशे जैसी बुराइयां प्रमुख हैं। ऐसे में उन्हें अपने इतिहास और गुरुओं की शिक्षाओं से अवगत कराना बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सिख इतिहास केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों से भी जुड़ा हुआ है। गुरु साहिबानों की शिक्षाएं हमें सत्य, साहस, सेवा और समानता का मार्ग दिखाती हैं। यदि युवा इन शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाते हैं, तो वे न केवल स्वयं को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए वक्ताओं ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि आज के युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती जीवनशैली और आधुनिकता के बीच कहीं न कहीं हमारी सांस्कृतिक पहचान कमजोर हो रही है। ऐसे में इस तरह की संगोष्ठियां युवाओं को अपनी पहचान और विरासत से जोड़ने का कार्य करती हैं।

वक्ताओं ने यह भी जोर दिया कि नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है कि युवा अपने जीवन में आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों को अपनाएं। गुरु साहिबानों की शिक्षाएं इस दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करती हैं।

इस अवसर पर युवाओं को प्रेरित किया गया कि वे अपने इतिहास को जानें, उसे समझें और उसे अपने जीवन में लागू करें। साथ ही, समाज में सकारात्मक संदेश फैलाने और दूसरों को भी जागरूक करने की जिम्मेदारी निभाएं।

कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। संगोष्ठी के माध्यम से न केवल धार्मिक ज्ञान का प्रसार हुआ, बल्कि सामाजिक जागरूकता का भी संदेश दिया गया।

अंत में आयोजकों ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखे और समाज में सकारात्मक योगदान दे सके।