हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि किसानों के लिए भरोसेमंद और लाभकारी खेती के रूप में उभर रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा वर्ष 2026-27 के बजट में प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में की गई वृद्धि ने किसानों के इस विश्वास को और मजबूत किया है।
🌾 MSP में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती से उगाई गई प्रमुख फसलों के MSP में उल्लेखनीय वृद्धि की है:
- गेहूं: ₹60 से बढ़ाकर ₹80 प्रति किलो
- मक्का: ₹40 से बढ़ाकर ₹50 प्रति किलो
- हल्दी: ₹90 से बढ़ाकर ₹150 प्रति किलो
इस फैसले से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है, जिससे प्राकृतिक खेती को और प्रोत्साहन मिलेगा।
🌱 किसानों में उत्साह
ग्रामीण क्षेत्रों में इस निर्णय को बेहद सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है। ऊना जिले के किसानों ने सरकार के इस कदम को किसान हितैषी और दूरदर्शी निर्णय बताया है। ऊना ब्लॉक के मलाहत गांव के प्रगतिशील किसान केवल चंद ने कहा कि MSP में बढ़ोतरी से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा और अधिक किसान इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। उन्होंने इसे युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। वहीं घालूवाल के किसान कुलवंत सिंह, जो पिछले सात-आठ वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, ने भी इस निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि वे गेहूं, मक्का, चना, मसूर और प्याज सहित कई फसलें प्राकृतिक तरीके से उगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से उनकी आय में सुधार हुआ है और उत्पादन क्षमता भी बढ़ी है। साथ ही, यह संतोष भी है कि वे लोगों को जहरमुक्त और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य उत्पाद उपलब्ध करा रहे हैं।
🌿 प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा
आत्मा परियोजना की उपनिदेशक डॉ. प्यारो देवी के अनुसार, ऊना जिले में 14,240 किसान पहले ही प्राकृतिक खेती से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि MSP में वृद्धि से इन किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और अन्य किसानों का रुझान भी इस ओर तेजी से बढ़ेगा। परियोजना के तहत किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, जिससे प्राकृतिक खेती को और मजबूत किया जा सके।
📈 आय बढ़ाने की दिशा में पहल
उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सरकार की सभी योजनाओं का लाभ हर किसान तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि इस पहल से न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि लोगों को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री भी उपलब्ध होगी।
