नाहन के ऐतिहासिक गुरुद्वारा दशमेश आस्थान साहिब में गुरु गोबिंद सिंह जी के नाहन आगमन दिवस को समर्पित भव्य आयोजन का शुभारंभ रविवार को नगर कीर्तन के साथ किया गया। इस अवसर पर गुरुद्वारा टोका साहिब से निकला नगर कीर्तन नाहन पहुंचा, जहां संगत ने श्रद्धा और उत्साह के साथ इसका स्वागत किया।
इतिहास के अनुसार लगभग 341 वर्ष पूर्व गुरु गोबिंद सिंह जी आनंदपुर साहिब से नाहन पहुंचे थे और यहां करीब साढ़े आठ माह तक निवास किया था। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में हर वर्ष यह आगमन पर्व बड़े धूमधाम और श्रद्धाभाव के साथ मनाया जाता है।

इस अवसर पर गुरुद्वारा परिसर में 10 दिवसीय “जोड़ मेला” भी आरंभ हुआ, जो 5 मई तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें दूर-दूर से संगत भाग लेगी।
नगर कीर्तन के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। संगत ने पूरे मार्ग में कीर्तन, अरदास और धार्मिक जयकारों के साथ गुरु साहिब के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। नाहन पहुंचने पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और स्थानीय संगत ने नगर कीर्तन का भव्य स्वागत किया।
इस संबंध में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान अमृत सिंह शाह ने बताया कि गुरु गोबिंद सिंह जी के नाहन आगमन पर्व को लेकर संगत में विशेष उत्साह है। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा टोका साहिब से निकला नगर कीर्तन इस पर्व का मुख्य आकर्षण होता है, जो नाहन पहुंचकर जोड़ मेले का शुभारंभ करता है।

उन्होंने बताया कि इस दौरान गुरुद्वारा परिसर में गुरबाणी कीर्तन, कथा वाचन और विशाल लंगर का आयोजन किया जा रहा है। पंथ के प्रसिद्ध रागी जत्थे और कथावाचक संगत को गुरबाणी के माध्यम से आध्यात्मिक संदेश देंगे और उन्हें निहाल करेंगे।
धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ यह पर्व सामाजिक समरसता और भाईचारे का भी प्रतीक है। लंगर में सभी वर्गों के लोग एक साथ बैठकर भोजन ग्रहण करते हैं, जो समानता और सेवा भावना का संदेश देता है।
इस 10 दिवसीय आयोजन के दौरान विभिन्न गुरमत समागम आयोजित होंगे, जिनमें श्रद्धालुओं को गुरु इतिहास, सिख परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से अवगत कराया जाएगा। इससे नई पीढ़ी को भी अपनी धार्मिक विरासत को समझने का अवसर मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन न केवल आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का भी संचार करते हैं। नाहन का यह ऐतिहासिक आयोजन हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता को भी दर्शाता है।

हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होते हैं और गुरु साहिब की शिक्षाओं को आत्मसात करने का प्रयास करते हैं। इस बार भी आयोजन को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं, ताकि सभी कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो सकें।
यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह नाहन शहर की पहचान और गौरव का भी प्रतीक है। गुरु गोबिंद सिंह जी के नाहन आगमन की यह ऐतिहासिक स्मृति आज भी लोगों के दिलों में जीवित है और हर वर्ष इसे पूरे श्रद्धाभाव से मनाया जाता है।
