अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने शिमला में कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) की सेवाओं को स्थानांतरित किए जाने के विरोध में जिलाधीश कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान महिला समिति ने गायनी ओपीडी को Indira Gandhi Medical College and Hospital में शिफ्ट करने और मदर एंड चाइल्ड यूनिट को स्थानांतरित किए जाने के फैसले का विरोध किया।
प्रदर्शन से पहले महिला समिति की ओर से पिछले एक सप्ताह में शिमला शहर में चलाए गए हस्ताक्षर अभियान का ज्ञापन जिलाधीश के माध्यम से हिमाचल प्रदेश सरकार को सौंपा गया। इसके साथ ही सरकार को एक विस्तृत ज्ञापन भेजकर कमला नेहरू अस्पताल की सेवाओं को यथावत रखने की मांग की गई।
इस प्रदर्शन को अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की राज्य अध्यक्ष Ranjana Jarait और राज्य महासचिव Phalma Chauhan ने संबोधित किया।
धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार लगातार महिला अस्पताल की सेवाओं के साथ छेड़छाड़ कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले गायनी ओपीडी को आईजीएमसी शिफ्ट किया गया और अब मदर एंड चाइल्ड यूनिट को भी वहां स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है।
महिला समिति ने कहा कि कमला नेहरू अस्पताल लगभग 102 वर्ष पुराना ऐतिहासिक अस्पताल है और इसे कमजोर करना महिलाओं के हितों के खिलाफ है। वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं को एक ही छत के नीचे सभी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए।

उन्होंने सरकार से मांग की कि रोबोटिक सर्जरी, आईवीएफ सेंटर और स्मार्ट लैब जैसी आधुनिक सुविधाओं को कमला नेहरू अस्पताल में ही मजबूत किया जाए, न कि महिलाओं को आईजीएमसी भेजा जाए।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आईजीएमसी पहले से ही अत्यधिक भीड़भाड़ वाला अस्पताल है। ऐसे में महिलाओं और नवजात शिशुओं को वहां संक्रमण का खतरा अधिक रहेगा। उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अलग महिला अस्पताल की आवश्यकता बनी रहनी चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि यदि किसी मरीज को विशेष रोबोटिक सर्जरी की जरूरत है तो उसे आवश्यकता अनुसार आईजीएमसी भेजा जा सकता है, लेकिन इसके नाम पर पूरे अस्पताल के विभागों को स्थानांतरित करना गलत नीति है।

महिला समिति ने आरोप लगाया कि सरकार अस्पताल के भवन और स्थान का अन्य विभागों के लिए उपयोग करने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि कमला नेहरू अस्पताल के ढांचे और सेवाओं को कमजोर करना महिलाओं के स्वास्थ्य अधिकारों के साथ समझौता है।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने मार्च और अप्रैल में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न शुल्कों में बढ़ोतरी का भी विरोध किया। उन्होंने सरकार से बढ़ाए गए शुल्कों को तुरंत वापस लेने की मांग की।
जनवादी महिला समिति ने मांग की कि कमला नेहरू अस्पताल को नियमित रूप से उसी स्थान पर संचालित रखा जाए और अस्पताल भवन के निर्माण एवं विस्तार कार्य को जल्द शुरू किया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शिमला और आसपास के क्षेत्रों की हजारों महिलाएं इस अस्पताल पर निर्भर हैं। ऐसे में अस्पताल की सेवाओं को विभाजित करने से महिलाओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा।
महिला समिति ने शिमला के विभिन्न सामाजिक संगठनों, महिला समूहों और नागरिकों से इस मुद्दे पर समर्थन देने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह केवल अस्पताल का मामला नहीं बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए महिला अस्पताल को बचाने की मांग उठाई।

जनवादी महिला समिति ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अस्पताल को स्थानांतरित करने के फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।