CAS बहाली की मांग, शिक्षकों ने राज्यपाल से की मुलाकात

rakesh nandan

14/04/2026

हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को लेकर जॉइंट एक्शन कमेटी (JAC) ने राज्यपाल से मुलाकात कर अपनी प्रमुख मांगें रखीं। प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष प्रो. जनार्दन सिंह और महासचिव डॉ. नितिन व्यास के नेतृत्व में कविंद्र गुप्ता से लोक भवन, शिमला में शिष्टाचार भेंट की।

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में व्याप्त समस्याओं को विस्तार से उठाया और विशेष रूप से Career Advancement Scheme (CAS) को तत्काल प्रभाव से बहाल करने की मांग प्रमुखता से रखी।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि वर्ष 2022 से CAS प्रक्रिया पर रोक लगाए जाने के कारण प्रदेश के लगभग 1500 से 2000 शिक्षकों पर सीधा असर पड़ा है। CAS, University Grants Commission के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत एक नियमित पदोन्नति प्रक्रिया है, जिसे रोकना शिक्षकों के अधिकारों का हनन है।

शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट किया कि CAS केवल वेतन वृद्धि का मामला नहीं है, बल्कि यह शिक्षकों की शैक्षणिक प्रगति, शोध कार्य, नवाचार और गुणवत्ता सुधार से सीधे जुड़ा हुआ है। यदि इस प्रक्रिया को लंबे समय तक रोका जाता है, तो इसका प्रभाव न केवल शिक्षकों के मनोबल पर पड़ेगा, बल्कि विद्यार्थियों की शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी।

प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश सरकार के इस निर्णय को तानाशाही रवैया बताते हुए कहा कि अन्य सेवाओं में पदोन्नति प्रक्रिया नियमित रूप से जारी है, जबकि शिक्षकों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने इसे असंवैधानिक बताते हुए तुरंत सुधार की मांग की।

इसके साथ ही JAC ने आरोप लगाया कि कुछ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सरकार को गलत आंकड़े प्रस्तुत कर रहे हैं, जिसके कारण यह धारणा बनाई जा रही है कि CAS लागू करने से राज्य पर अत्यधिक वित्तीय बोझ पड़ेगा। जबकि वास्तविकता यह है कि इसका वित्तीय प्रभाव सीमित है और इसे आसानी से वहन किया जा सकता है।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी चिंता जताई कि CAS प्रक्रिया के ठप होने से NAAC की ग्रेडिंग पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। NAAC मूल्यांकन में शिक्षकों की पदोन्नति, शोध कार्य और शैक्षणिक गतिविधियों को महत्वपूर्ण मानदंड माना जाता है। ऐसे में यदि पदोन्नति रुकती है, तो संस्थानों की रैंकिंग और प्रतिष्ठा प्रभावित होगी।

उन्होंने राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों की स्थिति पर भी चिंता जताई, जिनमें हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, चौधरी सरवन कुमार कृषि विश्वविद्यालय, डॉ. वाई.एस. परमार विश्वविद्यालय नौनी, सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी और हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, इन संस्थानों में संसाधनों की कमी और शिक्षकों के अधिकारों की अनदेखी के कारण शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

JAC ने कहा कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो प्रदेश की उच्च शिक्षा प्रणाली पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। इससे न केवल शोध कार्य प्रभावित होंगे, बल्कि योग्य प्रतिभाएं भी इस क्षेत्र से दूर हो सकती हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि शिक्षा क्षेत्र में निवेश को खर्च नहीं बल्कि भविष्य की पूंजी माना जाना चाहिए। यदि सरकार शिक्षा में कटौती करती है, तो इसका असर आने वाले वर्षों में प्रदेश के समग्र विकास पर पड़ेगा।

राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि इस विषय पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना बेहद जरूरी है और इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

अंत में जॉइंट एक्शन कमेटी ने चेतावनी दी कि यदि CAS को जल्द बहाल नहीं किया गया, तो पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षक समुदाय अब अपने अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष के लिए तैयार है।

कुल मिलाकर, यह मुद्दा हिमाचल प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुका है, जिस पर सरकार और प्रशासन को गंभीरता से विचार करना होगा।