हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में एक भव्य और प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मेरा युवा भारत (MY Bharat), युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को बाबा साहेब के विचारों—समानता, सामाजिक न्याय और शिक्षा—के प्रति जागरूक करना था।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उप-प्राचार्य संजेश कुमार शर्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लगभग 180 युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे यह आयोजन और भी प्रभावशाली बन गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि के स्वागत के साथ हुआ, जहां मेरा युवा भारत, शिमला के प्रतिनिधियों ने उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इसके बाद विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को बाबा साहेब के जीवन और उनके योगदान से परिचित कराया गया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण भाषण प्रतियोगिता रही, जिसमें प्रतिभागियों ने डॉ. अंबेडकर के जीवन संघर्ष, उनके द्वारा रचित भारतीय संविधान की महत्ता और सामाजिक समरसता के लिए उनके योगदान पर अपने विचार प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने यह भी बताया कि बाबा साहेब ने शिक्षा को सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम माना और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए आजीवन संघर्ष किया।
प्रतियोगिता में हिमानी ने प्रथम स्थान, साहिल ने द्वितीय स्थान और प्रिया ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। प्रतिभागियों के विचारों ने दर्शकों को प्रेरित किया और कार्यक्रम को एक नई दिशा दी।
इसके बाद संस्थान परिसर से चौड़ा मैदान तक एक जागरूकता पदयात्रा निकाली गई। इस पदयात्रा के माध्यम से युवाओं ने बाबा साहेब के प्रसिद्ध संदेश—“शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो”—को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया।
चौड़ा मैदान में स्थित बाबा साहेब की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान उपस्थित युवाओं ने उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प भी लिया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन केवल प्रेरणा नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शन है। उन्होंने समाज में समानता, न्याय और मानवाधिकारों की स्थापना के लिए जो कार्य किए, वे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे बाबा साहेब के विचारों को आत्मसात करें और एक समतामूलक समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
इस कार्यक्रम ने युवाओं में सामाजिक जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया। साथ ही यह संदेश भी दिया कि केवल जयंती मनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों को व्यवहार में उतारना भी आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया।
कुल मिलाकर, आईटीआई शिमला में आयोजित यह कार्यक्रम युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक पहल साबित हुआ, जिसने उन्हें सामाजिक न्याय, शिक्षा और समानता के मूल्यों के प्रति जागरूक किया और एक बेहतर समाज के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।