Himachal Pradesh University के परिसर में एक बार फिर लोक संस्कृति और परंपराओं की रंगीन छटा बिखरने जा रही है। विश्वविद्यालय में सोमवार से दो दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव ‘सांझी संस्कृति-सांझी विरासत’ का आगाज होगा। यह कार्यक्रम छात्र संगठन Students’ Federation of India (SFI) की विश्वविद्यालय इकाई द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जो उत्तर भारत के प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों में गिना जाता है।
यह उत्सव भारत की विविधता, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास है। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों की पारंपरिक झलक के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों से आए छात्र भी अपनी लोक संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे। इस तरह यह मंच ‘अनेकता में एकता’ की भावना को जीवंत रूप में दर्शाता है।
आज के आधुनिक दौर में जहां पारंपरिक कलाएं धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही हैं, वहीं यह उत्सव उन कलाओं को पुनर्जीवित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभर रहा है। कार्यक्रम में पुराने वाद्ययंत्रों, पारंपरिक पोशाकों और लोक नृत्यों को विशेष रूप से शामिल किया गया है। यह आयोजन न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने की दिशा में एक सशक्त पहल भी है।
SFI का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं होते, बल्कि छात्रों के बीच एक लोकतांत्रिक और समावेशी वातावरण तैयार करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। मौजूदा समय में जब समाज में विभाजनकारी प्रवृत्तियों के बढ़ने की बात सामने आती है, ऐसे में इस तरह के आयोजन सामाजिक समरसता और भाईचारे को मजबूत करते हैं।
उत्सव के पहले दिन के उद्घाटन समारोह में देश के प्रसिद्ध लेखक, वैज्ञानिक, फिल्म निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता Gauhar Raza मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उनकी उपस्थिति कार्यक्रम को एक विशेष आयाम देगी। वे छात्रों के साथ संवाद के माध्यम से विज्ञान, संस्कृति और समाज के बीच संबंधों पर अपने विचार साझा करेंगे, जो विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक साबित होगा।
इस दो दिवसीय कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक नृत्य ‘नाटी’ के साथ-साथ अन्य राज्यों के लोक नृत्य, संगीत और नाटक भी प्रमुख आकर्षण रहेंगे। विश्वविद्यालय परिसर इन प्रस्तुतियों के माध्यम से एक लघु भारत का रूप ले लेगा, जहां अलग-अलग संस्कृतियां एक साथ देखने को मिलेंगी।
छात्रों के लिए यह आयोजन केवल मंच प्रदर्शन का अवसर नहीं है, बल्कि यह उनके लिए अपनी जड़ों से जुड़ने और देश की विविधता को समझने का भी एक जरिया है। ऐसे कार्यक्रम छात्रों में आपसी सहयोग, समझ और सांस्कृतिक सम्मान की भावना को भी बढ़ाते हैं।
कुल मिलाकर, ‘सांझी संस्कृति-सांझी विरासत’ केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक विचार है जो भारत की असली पहचान—विविधता में एकता—को मजबूत करता है। यह आयोजन आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय परिसर को उत्सव के रंगों से सराबोर कर देगा और छात्रों के लिए यादगार अनुभव साबित होगा।