एचपी शिवा परियोजना से मंडी के किसानों की आय में बढ़ोतरी

rakesh nandan

03/06/2026

हिमाचल प्रदेश में कृषि और बागवानी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी हिमाचल प्रदेश उपोष्णकटिबंधीय बागवानी, सिंचाई एवं मूल्यवर्धन (एचपी शिवा) परियोजना अब किसानों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बनती जा रही है। मंडी जिले में इस परियोजना के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं, जहां प्लम की व्यावसायिक खेती किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है।

मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, सिंचाई सुविधाएं, प्रशिक्षण और बेहतर बाजार उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। इन प्रयासों का असर अब किसानों की आय में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

मंडी जिले के विकास खंड बल्ह के बृखमणी क्लस्टर और सुंदरनगर के खग्राओं क्लस्टर में उत्पादित उच्च गुणवत्ता वाला प्लम अब प्रदेश की सीमाओं से निकलकर देश के बड़े बाजारों तक पहुंच रहा है। महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों में इन फलों की मांग बढ़ रही है, जिससे स्थानीय किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं।

खग्राओं गांव के किसान संजय कुमार बताते हैं कि उन्होंने वर्ष 2022 में एचपी शिवा परियोजना के अंतर्गत प्लम का बाग लगाया था। उनके क्लस्टर में कुल 26 किसान जुड़े हुए हैं और लगभग 11.5 हेक्टेयर क्षेत्र में प्लम की खेती की जा रही है। शुरुआती वर्षों में उत्पादन सीमित रहा, लेकिन अब बागों ने व्यावसायिक उत्पादन देना शुरू कर दिया है।

संजय कुमार के अनुसार इस सीजन में क्लस्टर से लगभग तीन लाख रुपये की प्लम फसल का उत्पादन हो चुका है। इनमें अकेले उनकी हिस्सेदारी करीब दो लाख रुपये की रही है। किसानों को बाजार में 220 रुपये से लेकर 235 रुपये प्रति किलोग्राम तक का मूल्य प्राप्त हुआ है, जो पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं अधिक लाभदायक है।

उन्होंने बताया कि क्लस्टर में ब्लैक एंबर और सेंटा रोजा सहित चार उन्नत किस्मों के प्लम लगाए गए हैं। इन किस्मों की गुणवत्ता और स्वाद के कारण बाजार में इनकी अच्छी मांग बनी हुई है। किसानों का कहना है कि सरकारी सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन ने उन्हें आधुनिक बागवानी अपनाने के लिए प्रेरित किया है।

एचपी शिवा परियोजना के तहत किसानों को पंप हाउस, बोरवेल, सिंचाई सुविधाएं और अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध करवाए गए हैं। इसके अलावा मनरेगा के माध्यम से भी कई निर्माण कार्यों में सहायता मिली है। उद्यान विभाग द्वारा समय-समय पर प्रशिक्षण और तकनीकी परामर्श भी प्रदान किया जा रहा है।

फसल उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध करवाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। बागवानी विभाग ने किसानों को वैज्ञानिक तुड़ाई, फलों की ग्रेडिंग, पैकेजिंग और विपणन संबंधी प्रशिक्षण दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि किसानों को स्थानीय बाजारों के अलावा बड़े व्यापारिक नेटवर्क से भी जोड़ने में सफलता मिली।

बागवानी विभाग के उप निदेशक डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि विभाग का उद्देश्य किसानों को केवल स्थानीय मंडियों तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर के बड़े बाजारों तक पहुंचाना भी है। इसी दिशा में कार्य करते हुए एचपी शिवा परियोजना के तहत महाराष्ट्र की प्रतिष्ठित एग्री सप्लाई कंपनी GO4FRESH के साथ संपर्क स्थापित किया गया।

परियोजना के अंतर्गत तैयार प्लम की पहली नमूना खेप महाराष्ट्र भेजी जा चुकी है। इससे किसानों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिला है और भविष्य में बेहतर मूल्य मिलने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।

बागवानी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह वैज्ञानिक खेती, आधुनिक तकनीक और बेहतर विपणन व्यवस्था को बढ़ावा मिलता रहा तो आने वाले वर्षों में हिमाचल प्रदेश उपोष्णकटिबंधीय फल उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित कर सकता है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

एचपी शिवा परियोजना की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और किसानों की सक्रिय भागीदारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। मंडी जिले के प्लम उत्पादक किसानों की यह उपलब्धि प्रदेश के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।